A Thought by Anju Dokania: खयाल ही होते हैं वो अल्फाज़ जो कविता में ढल जाते हैं, शायरी बन जाते हैं..पढ़िये, जहन से उभरे और पेन से संवरे अन्जू डोकानिया के खयाल..
हर बार मन को समाधान नहीं चाहिए होता
कभी-कभी सिर्फ़ कुछ पल
ऐसे चाहिए होते हैं जहाँ हम
अपनी समस्याओं से बाहर साँस ले सके
ज़िंदगी धूप-छाँव है
कभी हर्षोल्लास का फागुन
तो कभी नीर भरा सावन
कभी रास्ते फूलों से भर जाते हैं
तो कभी पाँव काँटों से उलझते जाते हैं
ज़िंदगी हर दिन एक नई खोज है
मगर ,ज़िंदगी हर दिन एक नई खोज है मगर
उसके साथ कुछ नई समस्याएँ भी रोज़ हैं
और कई बार हम
अपनी ही मुश्किलों के ताने-बाने सुलझाने में
इतने उलझ जाते हैं हम
कि अपने आसपास घट रही
ज़िंदगी से ही बेख़बर हो जाते हैं
कुछ समस्याएँ ऐसी भी होती हैं
जिन्हें हम न स्मरण रखना चाहते हैं
न किसी से उनका ज़िक्र
बस उन्हें मन के किसी कोने में
कहीं चुपचाप रख देते हैं
लेकिन मन भी अजीब है
कभी-कभी अचानक उदास होकर
वह उस शख़्स के पास जाना चाहता है
जिसके साथ बैठकर उसे ख़ुशी मिलती है
तब उसे अपनी समस्याओं का
पिटारा खोलकर बैठना नहीं होता
न कोई समाधान चाहिए होता है, न कोई सलाह
बस कुछ पल ऐसे चाहिए होते हैं
जहाँ उन तकलीफ़ों का नाम भी न लिया जाए
जो रोज़ भीतर कुछ तोड़ती रहती हैं
बस बातें हों
बेवजह की, बचपन की, पुरानी यादों की
कभी हँसी हो, कभी कोई शरारत
कभी ख़ामोशी भी और तभी
ज़िंदगी कुछ पल के लिए
पॉज़ में चली जाती है
जहाँ न बीते कल का बोझ होता है
न आने वाले कल की चिंता
बस हम होते हैं
हमारा बचपन होता है
कोई अपना साथी होता है
और कुछ ऐसे पल, जिनमें
हम अपनी ही ज़िंदगी को
थोड़ी देर के लिए बाहर से देखते हैं
शायद यही छोटी-सी राहत
हमें फिर से जीने की ताक़त देती है
क्योंकि हर बार समस्याओं को
सुलझाना ही ज़रूरी नहीं होता
कभी-कभी उनसे कुछ पल की दूरी बनाकर
मुस्कुरा लेना भी ज़िंदगी का हिस्सा है
और शायद ज़िंदगी का
सबसे ख़ूबसूरत पॉज़ वही है
जहाँ हम अपनी परेशानियाँ नहीं
अपने होने का एहसास जीते हैं…
(अंजू डोकानिया)