जब कोई सेना का अपमान करता है, या उनको उल्टा सीधा बोलता है मेरे तो तन बदन में आग लग जाती है…
दो कौड़ी के भैंस जैसी जैनजी, आर्मी को चैलेंज करती हैं… एक आर्मी पर्सन होना कितनी बड़ी बात है, वह क्या-क्या सैक्रिफाइस करते हैं…
उनका परिवार क्या-क्या सैक्रिफाइस करता है…
जिसकी कोई कीमत नहीं है ना कोई कीमत लगा सकता है… और बड़े अफसोस की बात है कि हमारे देश की निकम्मी सरकारी उन आर्मी पर्सन की सैलरी से भी टैक्स लेती है,
इसलिए किसी को यह बोलने का तो बिल्कुल अधिकार नहीं है कि तुम हमारे टैक्स के पैसों से पलते हो….
हमारी आर्मी हमारे देश के बॉर्डर पर खड़ी होती है, तब हम चैन से जी रहे हैं, हमारे बच्चे सेफ हैं…
और जिन लोगों के दिल में अपने आर्मी के लिए सम्मान नहीं है उनका जीना बेकार है ।
एक चक्कर वॉर मेमोरियल दिल्ली का लगा कर आना…. रोंगटे खड़े हो जाते हैं वहां पत्थरों पर लिखे नाम पढ़कर.. गिनती नहीं कर पाओगे…
वो वह लोग हैं, जिनकी माँओं ने अपने बच्चे देश की रक्षा के लिए कुर्बान कर दिए….
तुम खा पी के भैंस की तरह गैंडे की तरह होकर, तुम मजे लेने के लिए पहाड़ों में जाते हो…
और वहां जाकर हमारे आर्मी को ही गाली देते हो…
वह भी तब जब वह अपनी ड्यूटी कर रहे हैं…
शेम ऑन यू, थू है ऐसी सोच पर।
पता नहीं क्यों आर्मी के इतने हाथ बांध रखे हैं, ऐसी हथिनियों को तो वहीं तोड़ना चाहिए सबके सामने।
(आराध्या यादव)




