Power Women: सााल 2025 में दुनिया की सबसे ताकतवर महिलाएं कौन हैं जानिये – आखिर महिलाओं के हाथों में कितनी असली ताकत है?..
Forbes की 2025 की दुनिया की सबसे ताकतवर महिलाओं की सूची ने दिखाया कि टेक्नोलॉजी, राजनीति, AI, बैंकिंग और ग्लोबल कारोबार में महिलाएं तेजी से शक्ति के केंद्र में पहुंच रही हैं। जानिए किन महिलाओं के हाथों में है दुनिया की असली ताकत और कहां अब भी बनी हुई हैं सीमाएं।
दुनिया तेजी से बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), वैश्विक राजनीति, वित्तीय व्यवस्था, रक्षा, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी के नए दौर में अब महिलाएं भी केवल भागीदारी नहीं कर रहीं, बल्कि कई बड़े फैसलों की दिशा तय कर रही हैं। Forbes की “World’s 100 Most Powerful Women 2025” सूची इसी बदलती तस्वीर को सामने लाती है। यह सूची बताती है कि आज दुनिया की कई सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं, कंपनियों और सरकारों में महिलाओं का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, इसके साथ एक सच्चाई यह भी है कि दुनिया की सबसे ऊंची शक्ति संरचनाओं तक महिलाओं की पहुंच अब भी सीमित बनी हुई है।
आज वैश्विक ताकत वहां केंद्रित हो रही है जहां भविष्य का निर्माण हो रहा है। AI, चिप निर्माण, रक्षा तकनीक, वैश्विक सप्लाई चेन और पूंजी निवेश जैसे क्षेत्रों में फैसले करने वाले लोग आने वाले दशक की दिशा तय करेंगे। इस बार Forbes की सूची में शामिल महिलाएं उन्हीं क्षेत्रों के केंद्र में मौजूद हैं। वे अरबों डॉलर के निवेश नियंत्रित कर रही हैं, तकनीकी विकास की गति तय कर रही हैं और ऐसे निर्णय ले रही हैं जिनका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और राजनीति पर पड़ता है।
टेक्नोलॉजी सेक्टर में महिलाओं की शक्ति सबसे अधिक स्पष्ट दिखाई देती है। इस समय AI की होड़ ने दुनिया में टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड निवेश शुरू कर दिया है। अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियां हर साल सैकड़ों अरब डॉलर खर्च कर रही हैं। ऐसे दौर में सेमीकंडक्टर यानी चिप निर्माण कंपनियों का महत्व बहुत बढ़ गया है। AMD की CEO लिसा सू इस क्षेत्र की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में गिनी जा रही हैं। उनके फैसले तय करते हैं कि दुनिया की AI कंपनियों को जरूरी चिप्स कितनी तेजी से मिल पाएंगी। आसान भाषा में कहें तो AI की रफ्तार काफी हद तक उनके निर्णयों पर निर्भर करती है।
इसी तरह दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में भी महिलाओं की भूमिका बेहद मजबूत हुई है। Alphabet, Nvidia, Meta और Microsoft जैसी कंपनियों की वित्तीय रणनीति संभालने वाली महिलाएं आज वैश्विक टेक्नोलॉजी के भविष्य की दिशा तय कर रही हैं। इन कंपनियों का कुल बाजार मूल्य खरबों डॉलर में पहुंच चुका है। AI का विस्तार कितनी तेजी से होगा, किस क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और टेक सेक्टर कितना स्थिर रहेगा, यह काफी हद तक इन्हीं महिलाओं के आर्थिक फैसलों पर निर्भर करता है।
AI की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में कुछ नई महिला नेता भी तेजी से उभरी हैं। Anthropic की सह-संस्थापक डेनिएला अमोडेई उन चुनिंदा महिलाओं में शामिल हैं जिन्होंने एक बड़ी AI कंपनी में संस्थापक और शीर्ष प्रबंधन दोनों स्तरों पर जगह बनाई है। उनकी कंपनी की वैल्यूएशन अरबों डॉलर तक पहुंच चुकी है। इसी तरह OpenAI की CFO सारा फ्रायर भी दुनिया की सबसे चर्चित AI कंपनियों में से एक की वित्तीय रणनीति संभाल रही हैं। AI सेक्टर महिलाओं के लिए बड़ी संपत्ति और प्रभाव पैदा कर रहा है, लेकिन अब भी बहुत कम महिलाएं ऐसी कंपनियों की संस्थापक बन पाती हैं।
राजनीति के क्षेत्र में भी महिलाओं की ताकत अब केवल प्रतीकात्मक नहीं रही। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी हैं। वे ऐसे समय में जापान का नेतृत्व कर रही हैं जब दुनिया में चिप सुरक्षा, रक्षा नीति और जनसंख्या संकट जैसे बड़े मुद्दे सामने हैं। जापान दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और वहां लिए गए फैसलों का असर पूरे एशिया और वैश्विक उद्योगों पर पड़ता है।
यूरोप में भी महिलाओं के हाथों में बड़ी जिम्मेदारियां हैं। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की प्रमुख क्रिस्टीन लगार्ड ऊर्जा संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध के असर, रक्षा खर्च और आर्थिक दबाव जैसी चुनौतियों से निपट रही हैं। यूरोप की स्थिरता काफी हद तक उनके नेतृत्व पर निर्भर मानी जा रही है।
उधर मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शेनबाम उत्तर अमेरिका के बदलते औद्योगिक ढांचे के केंद्र में हैं। अमेरिका और चीन के बीच तनाव के कारण कई कंपनियां अब उत्पादन इकाइयां मेक्सिको की ओर शिफ्ट कर रही हैं। इससे मेक्सिको की रणनीतिक अहमियत बढ़ी है। वहीं अफ्रीकी देश नामीबिया की प्रधानमंत्री नेटुम्बो नांडी-नडैतवाह भी वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण होती जा रही हैं क्योंकि उनके देश में दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार हैं। ये खनिज आधुनिक टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं।
हालांकि दुनिया की शीर्ष 25 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में केवल कुछ ही देशों का नेतृत्व महिलाओं के हाथ में है। फिर भी जहां-जहां वैश्विक व्यवस्था बदल रही है, वहां महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण बनती जा रही है।
वित्तीय दुनिया में महिलाओं का प्रभाव अलग तरह की शक्ति दिखाता है। Citi बैंक की CEO जेन फ्रेजर दुनिया के सबसे बड़े बैंकिंग संस्थानों में से एक को संभाल रही हैं। आर्थिक अस्थिरता और वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच उनके फैसले लाखों लोगों और कंपनियों को प्रभावित करते हैं। DBS बैंक की CEO टैन सु शान एशिया के तेजी से बढ़ते बाजारों में निवेश और कर्ज व्यवस्था की दिशा तय कर रही हैं।
ब्राजील के सरकारी बैंक Banco do Brasil की प्रमुख टार्सियाना मेडेरोस भी बेहद प्रभावशाली मानी जा रही हैं। उनका बैंक लैटिन अमेरिका की कृषि अर्थव्यवस्था और निर्यात क्षेत्र को वित्तीय समर्थन देता है। ऐसे में उनके फैसले पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर असर डालते हैं।
उद्योग और रक्षा क्षेत्र में भी महिलाएं अब निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। SpaceX की ग्वेने शॉटवेल दुनिया की सबसे अहम अंतरिक्ष और रक्षा परियोजनाओं को संभाल रही हैं। SpaceX केवल एक निजी कंपनी नहीं रही, बल्कि कई देशों की संचार और रक्षा जरूरतों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
इस सूची में एक दिलचस्प बदलाव यह भी दिखाई देता है कि अब सांस्कृतिक प्रभाव भी आर्थिक ताकत में बदल रहा है। अमेरिकी सेलिब्रिटी किम कार्दशियन इसका बड़ा उदाहरण हैं। उनकी कंपनी Skims की कीमत अरबों डॉलर तक पहुंच गई है। उन्होंने Nike के साथ मिलकर नया ब्रांड भी लॉन्च किया है। यह दिखाता है कि सोशल मीडिया और लोकप्रियता अब सीधे बड़े बिजनेस मॉडल में बदल सकती है।
इसी तरह Netflix के चर्चित KPop Demon Hunters प्रोजेक्ट से जुड़ी महिलाओं ने 2025 में वैश्विक मनोरंजन जगत में बड़ी पकड़ बनाई। उनकी लोकप्रियता उम्र, भाषा और देशों की सीमाओं से आगे निकल चुकी है। यह साबित करता है कि जिन लोगों के पास सीधे जनता तक पहुंच है, वे आज नई तरह की वैश्विक शक्ति हासिल कर रहे हैं।
Forbes की यह सूची एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। महिलाएं अब दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं को संभाल रही हैं। वे टेक्नोलॉजी, बैंकिंग, राजनीति, रक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। लेकिन इसके बावजूद सत्ता की सबसे ऊंची संरचनाएं अब भी पूरी तरह उनके लिए खुली नहीं हैं।
दुनिया अब ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां यह तय होगा कि भविष्य में नेतृत्व वास्तव में साझा होगा या फिर महिलाओं से केवल संकट के समय संस्थाओं को संभालने की उम्मीद की जाती रहेगी। आने वाले वर्षों में यही फैसला तय करेगा कि वैश्विक शक्ति का अगला अध्याय कैसा दिखाई देगा।
(सुमन पारिजात)



