ट्विशा शर्मा केस को नारीवाद या पितृसत्ता के नजरिए से देखने वाले वस्तुतः दया के पात्र हैं…इन्हें हर घटना,हर हादसे के पीछे विचारधारा सूँघने की बीमारी होती है…जबकि इस प्रकार के हादसे विवेकशीलता और संवेदनशीलता मांगते हैं!
विवेकशील तर्क सिर्फ यही है कि जब पेशेवर वकील समर्थ सिंह और उनकी माँ रिटायर जज गिरिबाला सिंह को पता था कि ट्विशा एक पेशेवर मॉडल है,मिस पुणे रह चुकी है और आगे भी वो मॉडलिंग करना चाहती हैं तो अपने से बिल्कुल विपरीत पृष्ठभूमि की बहु क्यों चुनी!जवाब यह है कि क्योंकि आपका बेटा समर्थ स्वयं न तो सरकारी वकील था न जज, अरेंज मैरिज के लिए उसे अपने पेशे में अपने जैसी पार्टनर मिलती ही नहीं!
मां के रुतबे और संपत्ति के बावजूद सरकारी नौकरी वाली बहु भी नहीं मिलती….स्कूल टीचर या प्राइवेट जॉब वाली ही मिल सकती थी या सिंपल पढ़ी,लिखी हाउस वाइफ…पर इनके अरमान तो बड़े थे,कुंठा भी होती है ऐसे लोगों में कि सबको अपने लेवल का पार्टनर मिल रहा है तो मैं कुछ अलग कर दिखाऊँ..तो कर ली शादी मॉडल से….और फिर जब कुंठा मिट गई दुनिया के सामने कि देखो जबलपुर में रहने के बावजूद मैने एक बेहद आधुनिक परिवेश में पली बढ़ी युवती , जो मिस पुणे भी रह चुकी है , से शादी कर ली है….
किंतु उसके बाद गिरिबाला सिंह की रूढ़िवादी सोच हावी हो गई…वो बतौर जज भी अड़ियल किस्म की मानी जाती हैं…अब ट्विशा को अपने रंग में रंगने का खेल शुरू हुआ! जब बात नहीं बनी तो उसे मेंटली डिस्टर्ब घोषित कर दिया..भारतीय समाज की,विशेषकर छोटी मानसिकता के लोगों की प्रवृत्ति है यह कि जो भी लीक पर नहीं चलेगा उसे पागल घोषित कर देंगे! तो अपने बेटे के लिए अपने ही परिवेश की लड़की लानी थी…
फिर सास बनने के शौक पूरे करने थे! ट्विशा को भी एल एल बी करने का दबाव डालने लगे, नहीं तुम मॉडलिंग छोड़ो और वकील बन जाओ! तो वकील से ही ब्याह कर लेना था भाई!जबलपुर,सागर,दमोह की लड़की से ब्याह कर लेते!क्यों चाहिए थी आपको दिल्ली, नोएडा,पुणे जैसे बड़े शहर की आधुनिक लड़की! और उसकी आधुनिक परिवेश में हुई परवरिश को स्वीकार न सके तो उसे चरित्रहीन साबित करने लगे!यही मानसिकता होती है ऐसे लोगों की! गिरिबाला सिंह स्वयं मनोरोगी लगती हैं..
टीवी पर सुनिए उन्हें…क्राइम सीन को प्रोटेक्ट करने के लिए पुलिस ने छत को सीलबंद कर दिया है, इस अमानवीय स्त्री की सनक यह है कि छत सील कर दी है तो मेरे पौधों को पानी कैसे मिलेगा…क्योंकि मैडम ने छत पर बागबानी की हुई है!समर्थ नहीं बल्कि गिरिबाला सिंह दोषी हैं…जो देखकर ही एक बेहद अड़ियल किस्म की औरत लगती हैं..इसने अपने बेटे की गृहस्थी बर्बाद की है! अपनी बहु की होने वाली संतान को किसी और की संतान बताना,अपनी बहु से पूछना कि तुम्हारा किसी और से तो संबंध नहीं! ये सब हरकते कोई पागल ही करेगा!
प्रेम हो या अरेंज, विवाह हमेशा अपने जैसी पृष्ठभूमि के व्यक्ति से करना चाहिए….जो आपको समझे,जिसे आप समझो,जो आपके परिवार को समझे और आप उसके परिवार को समझो… पढ़े,लिखे,बुद्धिजीवी लोगों को तो कभी भी इस तरह मॉडल्स, होटल या फ्लाइट में काम करने वालों से, लेट नाइट जॉब करने वालो से,ज्यादा क्लबिंग पार्टी करने वालों से रिश्ता जोड़ना ही नहीं चाहिए…
आपका बौद्धिक स्तर कभी मैच नहीं करेगा भले प्रेम बहुत हो! उनके लिए सुख की समझ अलग होती है!! वकीलो और पुलिसवालों से भी शादी बहुत सोच –समझकर करनी चाहिए…उनका धंधा,उनकी दुनिया ही अलग होती है…दिन भर अपराधियों को सुनते,झेलते हैं….सबके झगड़े, टंटे निपटाते हैं…ये कभी बहुत ज्यादा संवेदनशील हो ही नहीं सकते, इन्हें हर चीज में, हर विषय में…हर व्यक्ति में शंका ही बनी रहती है,तीन –तेरा ही दिखता है!
गाली –गलौच इनका आम स्वभाव हो जाता है! विवाह को स्टेट्स सिंबल मत बनाइये,अपने जीवन,अपने परिवेश,अपनी पृष्ठभूमि को देखिए और ऐसे व्यक्ति को चुनिये जो हर तरह से मददगार साबित हो..जो आपको समझे ,न कि आपको जज करे….क्योंकि अंततः हम सब अपनी –अपना परिस्थितियों के अनुसार ढलते हैं…और जीवन अनुभव अब यह कहता है कि हमें चाहे जानें से ज्यादा समझे जाने की जरूरत होती है!
(सुजाता मिश्रा)



