Anjana Mumtaj: मीना कुमारी से मुलाक़ात ने बदली अंजना मुमताज़ की ज़िंदगी: पाकिज़ा की शूटिंग से शुरू हुआ सफ़र, बनीं सफल अभिनेत्री..
सालों पहले की बात है। मुंबई में फिल्म पाकिज़ा की शूटिंग चल रही थी। उस दिन सेट पर एक खास गाने की शूटिंग होनी थी जिसमें खुद मीना कुमारी नृत्य करने वाली थीं। खबर सुनकर एक युवा लड़की, जो खुद भी डांस की दीवानी थी, ज़िद करके स्टूडियो पहुंची। उसका मन था कि वह अपनी पसंदीदा अदाकारा को करीब से देखे और उनके नृत्य का आनंद ले।
पहली मुलाक़ात
शूटिंग के दौरान जब मीना कुमारी की नज़र उस लड़की पर पड़ी, तो उन्होंने उसे पास बुला लिया। लड़की बेहद सुंदर थी। मीना कुमारी ने मुस्कुराते हुए पूछा— “तुम फिल्मों में काम क्यों नहीं करती? तुम्हें तो ज़रूर फिल्मों में आना चाहिए।”
लड़की ने संकोच से जवाब दिया कि उसका फिल्म इंडस्ट्री में किसी से कोई परिचय नहीं है। तब मीना कुमारी ने उसे आश्वस्त किया और कहा कि उनके पति कमाल अमरोही एक फिल्म बना रहे हैं। उन्होंने लड़की को अपने घर आने का न्यौता दिया ताकि वह कमाल अमरोही से मिल सके।
उम्मीद और इंतज़ार
घर लौटकर लड़की बेहद खुश थी। उसे यक़ीन ही नहीं हो रहा था कि मीना कुमारी जैसी महान अदाकारा ने उसे बुलाया है। कुछ दिनों बाद उसे सचमुच मीना कुमारी के घर आने का संदेश मिला। वो खुशी-खुशी वहां पहुंच गई।
मीना कुमारी ने उसका गर्मजोशी से स्वागत किया, लेकिन कमाल अमरोही प्रभावित नहीं हुए। उन्हें लगा कि यह लड़की उनकी फिल्म के लिए उपयुक्त नहीं है। उन्होंने उससे कहा कि वह फिलहाल अपनी पढ़ाई पूरी करे और बाद में देखा जाएगा। लड़की थोड़ी उदास होकर घर लौटी, लेकिन अब उसके दिल में फिल्मों में काम करने की तीव्र इच्छा घर कर चुकी थी।
सपना सच होने जैसा
कुछ समय बाद अचानक कमाल अमरोही के ऑफिस से एक व्यक्ति उसके घर आया और बताया कि अगले दिन फिल्म का मुहूर्त है और वही इस फिल्म की नायिका होगी। लड़की को यक़ीन ही नहीं हुआ। वह पूरी रात उत्साह और हैरानी में जागती रही।
अगले दिन जब वह ऑफिस पहुंची, तो उसे पता चला कि सचमुच उसे हीरोइन चुना गया है। फिल्म का नाम था शंकर हुसैन।
पहली फिल्म और संघर्ष
लड़की बेहद खुश थी, लेकिन उसकी खुशी ज़्यादा दिनों तक टिक नहीं पाई। कुछ ही समय बाद शंकर हुसैन की शूटिंग रुक गई। हालांकि किस्मत ने उसका साथ दिया और जल्द ही उसे एक और बड़ी फिल्म मिल गई— संबंध। इस फिल्म में उसके हीरो थे देब मुखर्जी।
संबंध पूरी हुई, रिलीज़ हुई और सफल भी रही। इस तरह वह लड़की फिल्म इंडस्ट्री की नई हीरोइन बन गई। उसका नाम था अंजना, जो बाद में अंजना मुमताज़ के नाम से मशहूर हुईं।
करियर की शुरुआत
हालांकि शंकर हुसैन की शूटिंग पहले शुरू हुई थी, लेकिन यह फिल्म बाद में साल 1977 में रिलीज़ हुई। तब तक अंजना कई अन्य फिल्मों में काम कर चुकी थीं। उनकी पहचान एक प्रतिभाशाली और मेहनती अभिनेत्री के रूप में बनने लगी।
जन्म और जीवन
अंजना मुमताज़ का जन्म 04 जनवरी 1941 को मुंबई में हुआ था। आज वह 85 वर्ष की हो चुकी हैं। उनका सफ़र इस बात का प्रमाण है कि कभी-कभी एक संयोग, एक मुलाक़ात, और एक अवसर ज़िंदगी की दिशा बदल देता है।
मीना कुमारी से हुई वह पहली मुलाक़ात अंजना मुमताज़ के जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुई। एक साधारण लड़की, जो सिर्फ डांस देखने स्टूडियो गई थी, बाद में हिंदी सिनेमा की सफल अभिनेत्री बनी। यह कहानी बताती है कि सपनों को सच करने के लिए बस एक अवसर और दृढ़ इच्छाशक्ति की ज़रूरत होती है।
(अर्चना शेरी)



