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Thursday, January 15, 2026

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Poetry by Manisha Gupta: मैं एक पहेली, मेरे हल हो तुम..

Poetry by Manisha Gupta: भावनाओं के अनंत आकाश में शीतल पवन सी बहती हुई एक कविता..

 

मैं एक पहेली
मेरे हल हो तुम !

पावन गंगाजल हो तुम
मेरी ज़िन्दगी के सारे प्रश्नों के
हल हो तुम !

कठिन प्रश्नपत्र सी ज़िन्दगी
उत्तर कुंजिका से सरल हो तुम
मैं गंभीर गहरी समुंदर सी
मेरी मचलती उफनती लहर हो तुम !

मैं ख़ामोश सिमटी धरती सी
मेरे गर्वीले उच्च अनंत आकाश हो तुम !

मैं अपनी स्वप्निल दुनिया की साम्राज्ञी
मेरे मस्तक का चमकता रत्नजड़ित ताज हो तुम !

हां मेरे आज और कल हो तुम
मेरे दिल में गुंजित राग हो तुम !

मोह और नेह से भरे अनुराग हो तुम !

मेरे अस्तित्व मेरी पहचान मेरे संसार मेरे राम हो तुम !!

(मनीषा)

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