Crime Against Women:अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों का सबसे गंभीर संकट – दस सच जान कर हैरान रह जायेंगे आप..
14 अगस्त 2025, संयुक्त राष्ट्र महिला प्रेस विज्ञप्ति — अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों पर संकट लगातार गहराता जा रहा है। अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से अब तक, महिलाओं और लड़कियों पर लगाए गए दर्जनों प्रतिबंधों ने उन्हें शिक्षा, रोजगार, स्वतंत्र आवागमन और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी जैसे मूल अधिकारों से वंचित कर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र महिला संगठन ने इस संकट की गंभीरता को समझाने के लिए 10 प्रमुख तथ्यों का संकलन किया है, जो अफगानिस्तान की लगभग 2.1 करोड़ महिलाओं को प्रभावित कर रहे हैं।
1. शिक्षा पर प्रतिबंध से पिछड़ रही है एक पूरी पीढ़ी
तालिबान शासन ने 13 वर्ष से अधिक आयु की लड़कियों को माध्यमिक शिक्षा से वंचित कर दिया है और महिलाओं के लिए विश्वविद्यालयों में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। नतीजतन, 18 से 29 वर्ष की आयु की लगभग 80% युवा महिलाएं शिक्षा, नौकरी या प्रशिक्षण से पूरी तरह कट चुकी हैं।
2. कार्यबल में लैंगिक असमानता चरम पर
अफगानिस्तान में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की भागीदारी कार्यबल में बेहद कम है। जहां लगभग 90% पुरुष काम कर रहे हैं या काम की तलाश में हैं, वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा सिर्फ 25% है। तालिबान ने महिलाओं को सरकारी सेवा, NGO और ब्यूटी सैलून जैसे क्षेत्रों में काम करने से रोकने वाले व्यापक प्रतिबंध लागू किए हैं।
3. स्वास्थ्य संकट से जूझ रही हैं महिलाएं
शिक्षा पर प्रतिबंधों के कारण बाल विवाह में 25%, किशोर गर्भधारण में 45% और मातृ मृत्यु दर में 50% तक की वृद्धि का अनुमान है। मानसिक स्वास्थ्य भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है — चिंता, अवसाद और निराशा की दरें लगातार बढ़ रही हैं।
4. निर्णय प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर हैं महिलाएं
तालिबान शासन में महिला प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो चुका है। कैबिनेट और उप-राष्ट्रीय स्तर पर सभी निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में केवल पुरुषों का वर्चस्व है।
5. सार्वजनिक स्थानों पर जाने की मनाही
महिलाओं को पार्क, जिम और खेल क्लबों जैसे सार्वजनिक स्थलों पर जाने से रोका जा रहा है। यह प्रतिबंध उन्हें सामाजिक जीवन से पूरी तरह अलग कर रहा है।
6. लिंग आधारित हिंसा का बढ़ता खतरा
हालांकि देशव्यापी आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन प्रत्यक्ष साक्ष्य बताते हैं कि 2021 के बाद से स्थिति और भी खराब हुई है। महिला मामलों के मंत्रालय और हिंसा के मामलों में कानूनी सहायता देने वाले संस्थानों को समाप्त कर दिया गया है।
7. युद्ध के बाद भी महिलाएं असुरक्षित महसूस करती हैं
हालांकि अफगानिस्तान में सक्रिय युद्ध समाप्त हो चुका है, लेकिन महिलाएं अपने समुदायों में सुरक्षित महसूस नहीं करतीं। तालिबान की दमनकारी नीतियों ने भय और असुरक्षा का माहौल बना दिया है।
8. तालिबान के 3,300 से अधिक पुरुष अधिकारी महिलाओं की स्वतंत्रता पर निगरानी रख रहे हैं
अगस्त 2024 में लागू किए गए “नैतिकता कानून” के तहत महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर बोलने तक से रोका जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के सर्वेक्षणों में पाया गया कि परिवार और समुदाय भी अब इन कानूनों के अनुसार महिलाओं की स्वतंत्रता पर रोक लगा रहे हैं।
9. शरणार्थी संकट ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है
अफगानिस्तान पहले से ही संघर्ष, गरीबी और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है। 2025 में 17 लाख से अधिक अफगानी नागरिक ईरान और पाकिस्तान से लौटे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और लड़कियां शामिल हैं। ये महिलाएं अब बाल विवाह, हिंसा और शोषण के बढ़ते खतरे का सामना कर रही हैं।
10. वैश्विक सहायता में कटौती से महिला संगठनों पर असर
संयुक्त राष्ट्र के मार्च 2025 के सर्वेक्षण में शामिल 207 महिला नेतृत्व वाले संगठनों में से 40% ने बताया कि उनकी परियोजनाएं बंद हो चुकी हैं। दान में कटौती के कारण ये संगठन अब महिलाओं तक सेवाएं पहुंचाने, दुर्व्यवहार का दस्तावेजीकरण करने और एकजुटता के नेटवर्क बनाए रखने में असमर्थ हो रहे हैं।
उम्मीद की किरण
इन तमाम प्रतिबंधों और चुनौतियों के बावजूद, अफगान महिलाएं हार नहीं मान रही हैं। वे स्थानीय स्तर पर समुदायों का निर्माण कर रही हैं, छोटे व्यवसाय चला रही हैं, ज़रूरतमंद महिलाओं को सेवाएं दे रही हैं और मानवाधिकार हनन का दस्तावेजीकरण कर रही हैं।
उनका यह साहस और संकल्प दुनिया को यह संदेश देता है कि उन्होंने हार नहीं मानी है — और वे हमसे भी यही उम्मीद करती हैं कि हम भी उनके संघर्ष में साथ खड़े रहें, चाहे जहाँ भी हों हम !!
(सुमन पारिजात)



