मन का नेटवर्क आउट ऑफ कंट्रोल हो गया है,
दिल का सिग्नल भी डांवाडोल हो गया है!
ख्यालों की भीड़ में इतना शोर मचा है,
सुकून का मैसेज जैसे होल्ड हो गया है!
कभी यादों की कॉल अचानक बज उठती है,
कभी तन्हाई की स्क्रीन ही जम जाती है!
दिल चाहता है थोड़ा सुकून डाउनलोड कर लूँ,
पर बेचैनी की फाइल फिर खुल जाती है!
खुद से ही बात करना भूल गया हूँ शायद,
तभी हर रिश्ता थोड़ा कोल्ड हो गया है!
मन का नेटवर्क आउट ऑफ कंट्रोल हो गया है,
दिल का सिस्टम भी अब ओवरलोड हो गया है!
कभी उम्मीद का राउटर फिर से ऑन कर लेता हूँ,
पर शक का वायरस सब कंट्रोल ले जाता है!
खुशियों की नोटिफिकेशन दस्तक देती तो है कभी-कभी,
पर दिल का इनबॉक्स फिर भी खाली रह जाता है!
कभी खुद को ही रीस्टार्ट करने की सोचता हूँ,
शायद फिर सब कुछ नॉर्मल हो जाए!
दिल के सारे एरर मिट जाएँ एक दिन,
और सुकून का नेटवर्क फिर से जुड़ जाए!
इसी उम्मीद में उलझा मेरा दिल,
जलेबी-सा गोल-गोल हो गया है!
सोच की गलियों में भटकते-भटकते,
सुकून का रास्ता भी जैसे होल्ड हो गया है!
ख़्वाहिशों की गर्माहट में पिघल कर
ज़िंदगी का सॉफ्टवेयर भी अनमोल हो गया है!
(अंजू डोकानिया)