Rashmika-Vijay Marriage: एक फिल्म का मजेदार डायलॉग याद आ गया – ‘देखो जली जली ..देखो धुआँ उठा..’ पता नहींं कुछ धर्मविरोधी लोग अपनी घटिया कुन्ठा का परिचय देने में लजाते क्यों नहीं हैं..
बॉलीवुड की सेलेब्रिटी जोड़ी रश्मिका-विजय की शादी पर मृणाल पांडे का विवादित बयान आयेगा, इसकी किसी को कोई उम्मीद नहींं थी। ये जला-कुढ़ा बयान इस विवाह को तो कोई चोट नही पहुंचा सका किन्तु इस वामपंथी लेखिका को चेहरा फिर एक बार खुल कर सामने आ गया है. इस शादी का संदर्भ लेकर महाभारत की महान स्त्रियों को ‘दुखद भाग्य’ वाली बताने की टुच्ची कोशिश की गई जिसको सोशल मीडिया में जम कर लताड़ा गया।
नेशनल क्रश रश्मिका मंदाना और साउथ इंडस्ट्री के सुपरस्टार विजय देवरकोंडा की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं। उदयपुर में हुई इस शाही शादी की झलकियों ने जहाँ प्रशंसकों को बेहद खुश कर दिया, वहीं लेखिका और पद्मश्री सम्मानित मृणाल पांडे अपने एक कमेंट की वजह से विवादों में घिर गईं। शादी की इन तस्वीरों पर उनकी प्रतिक्रिया को लोगों ने ‘हिन्दू धर्म विरोधी सोच’ और ‘नफरत से भरा एजेंडा’ करार दिया। उनके बयान के बाद इंटरनेट पर नई बहस छिड़ गई और यूजर्स ने उन्हें धर्मग्रंथों और इतिहास का सही ज्ञान लेने की सलाह दी।
मृणाल पांडे का विवादित कमेंट क्या था?
दरअसल, शादी की एक फोटो पर एक यूजर ने लिखा कि यह जोड़ा ‘महाभारत के द्रौपदी और अर्जुन’ जैसी झलक देता है। इस पोस्ट पर आशीर्वाद देने के बजाय मृणाल पांडे ने तंज कसते हुए लिखा—
“उम्मीद है कि दुल्हन की किस्मत द्रौपदी, कुंती, गांधारी, तारा, मंदोदरी और अहिल्या जैसी न हो।”
उनका यह बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। आलोचकों का कहना है कि वही मृणाल पांडे, जो ‘लव जिहाद’ को महिला की व्यक्तिगत पसंद बताकर उसका समर्थन करती हैं, अब हिन्दू धर्म की महान स्त्रियों को केवल उनके ‘दुखद भाग्य’ तक सीमित कर अपमानित करने की कोशिश कर रही हैं।
नेटिज़न्स ने दिये महाभारत वाले जवाब
जैसे ही मृणाल पांडे ने इन महान स्त्रियों के सम्मान पर सवाल उठाया, यूजर्स ने उन्हें तथ्य और उदाहरणों के साथ करारा जवाब दिया। शाइन हमेशा नाम के एक यूजर ने लिखा –
द्रौपदी : महाभारत का युद्ध उनके सम्मान के लिए हुआ और कौरवों के सौ पुत्र मारे गए।
कुंती : पांडवों ने किसी के आगे सिर नहीं झुकाया, सिवाय अपनी माता कुंती के।
गांधारी : उन्होंने अपने आदर्शों के चलते स्वयं अपनी आँखों पर पट्टी बाँध ली थी जब उनका विवाह धृतराष्ट्र से हुआ। किसी ने उन्हें मजबूर नहीं किया। शकुनि ने युद्ध इसलिए भड़काया क्योंकि उसे लगा कि उसकी बहन का विवाह एक अंधे पुरुष से गलत तरीके से हुआ।
मंदोदरी : वे जोधपुर की राजकुमारी थीं। जब हनुमान ने लंका जला दी थी, तब उनके पिता ने उसका पुनर्निर्माण कराया। उन्होंने बार-बार रावण को उसके गलत कामों से रोका, जबकि किसी और में इतना साहस नहीं था।
अहिल्या : उन्हें भगवान राम के स्पर्श से मोक्ष प्राप्त हुआ।
यूजर ने साथ ही ये भी लिखा -“आपके द्वारा उल्लेखित सभी महिलाएँ शक्तिशाली थीं। उन्हें केवल उनके विवाह तक सीमित मत कीजिए।”
लोगों का गुस्सा: हिन्दू नाम क्यों रख रखा है?
मृणाल पांडे के इस बयान पर लोगों का गुस्सा इतना बढ़ गया कि उन्होंने उनके नाम और विचारधारा पर ही सवाल उठा दिए। एक यूजर ने लिखा –
“भगवान कृष्ण द्रौपदी के लिए आए थे। कुंती छह धर्मराजों की माँ थीं। तारा, मंदोदरी और अहिल्या पूजनीय हैं। अगर आपको कुछ ज्ञान है तो उसी के अनुसार उम्मीद करनी चाहिए।”
दूसरे यूजर ने तीखा हमला करते हुए कहा –
“अगर आपको हिन्दू धर्म से इतनी नफरत है तो आप अभी भी हिन्दू नाम क्यों रखती हैं? कृपया जिस धर्म को पसंद करती हैं उसे अपनाइए और हमें अपनी घटिया पोस्ट से बचाइए।”
एक अन्य यूजर ने तो उनकी तुलना विवादित चेहरों से करते हुए लिखा –
“उम्मीद है कि रश्मिका का किरदार राणा, आरफा, अरुंधति, स्वरा और मृणाल पांडे से अलग होगा।”
नफरत बनाम आस्था
सोशल मीडिया पर चल रही इस बहस में कई लोग मृणाल पांडे को एक ऐसी ‘विषाक्त लेखिका’ मान रहे हैं, जो हर खुशी के मौके पर हिन्दू धर्म को नीचा दिखाने का अवसर तलाशती हैं। यूजर्स का कहना है कि जब रश्मिका ने आधुनिक ट्रेंड छोड़कर पारंपरिक दुल्हन के रंग और गहने चुने, तो यह वामपंथी विचारधारा वाले लोगों को पसंद नहीं आया। इसी कारण वे उनके सौभाग्य की तुलना दुर्भाग्य से करने लगे।
(सुमन पारिजात)



