Woman Shooter: बेटी को नहीं मिला दाखिला, मां ने थामी पिस्टल: 36 वर्ष की उम्र में इतिहास रचते हुए सागर जिले की पहली राष्ट्रीय पिस्टल शूटिंग खिलाड़ी बनीं प्रतिभा सिंह..
सागर जिले की खेल दुनिया में एक नई मिसाल कायम हुई है, जहां एक मां ने अपने अधूरे सपनों को हिम्मत, अनुशासन और अथक परिश्रम के बल पर साकार कर दिखाया। पिस्टल शूटिंग खिलाड़ी प्रतिभा सिंह ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाते हुए इंडिया टीम (ग्रुप-बी) में चयन हासिल किया है। खास बात यह है कि वे सागर जिले की पहली महिला पिस्टल शूटिंग खिलाड़ी हैं, जिन्हें राष्ट्रीय टीम में स्थान मिला है। 36 वर्ष की उम्र में, दो बच्चों की मां होने के बावजूद यह उपलब्धि हासिल कर उन्होंने न केवल जिले, बल्कि पूरे प्रदेश की महिलाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
बचपन का सपना, बेटी की ठोकर और मां का फैसला
प्रतिभा सिंह को बचपन से ही शूटिंग खेल के प्रति गहरी रुचि थी, लेकिन उस समय परिस्थितियों ने उन्हें अपने सपने को पूरा करने का अवसर नहीं दिया। समय के साथ उनकी शादी हुई, परिवार बढ़ा और जीवन की जिम्मेदारियां बढ़ती चली गईं। वर्षों बाद जब वे अपनी बेटी को शूटिंग अकादमी में दाखिला दिलाने पहुंचीं, तो उम्र कम होने के कारण बेटी को प्रवेश नहीं मिल सका। इसी क्षण प्रतिभा के भीतर दबा हुआ सपना फिर से जाग उठा।
उन्होंने अपने पति से इस विषय पर खुलकर चर्चा की और जब परिवार का समर्थन मिला, तो उन्होंने खुद ही शूटिंग की प्रैक्टिस शुरू करने का निर्णय लिया। यह फैसला उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। महज तीन महीनों की नियमित मेहनत और प्रशिक्षण के बाद वे एक प्रोफेशनल शूटर बनने की राह पर बढ़ चलीं।
तीन साल की मेहनत से राष्ट्रीय टीम तक का सफर
प्रतिभा सिंह की यह उपलब्धि किसी एक दिन का परिणाम नहीं है। इसके पीछे तीन वर्षों की लगातार मेहनत, सटीक मार्गदर्शन और अनुशासित अभ्यास छिपा हुआ है। उन्होंने राज्य और प्री-स्टेट स्तर की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए और सागर शहर को गौरवान्वित किया।
दिल्ली में आयोजित 68वीं नेशनल पिस्टल शूटिंग चैंपियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर उन्होंने इंडिया टीम (ग्रुप-बी) में स्थान हासिल किया। इस चयन के साथ ही वे सागर जिले की पहली ऐसी पिस्टल शूटिंग खिलाड़ी बन गईं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर की टीम में प्रवेश किया है।
परिवार, जिम्मेदारियां और अभ्यास के बीच संतुलन
प्रतिभा सिंह के लिए सबसे बड़ी चुनौती खेल और पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन बनाना रहा। एक ओर डॉक्टर पति की दिनचर्या, बच्चों को स्कूल भेजने की जिम्मेदारी और घर के सभी काम, तो दूसरी ओर शूटिंग अभ्यास के लिए समय निकालना आसान नहीं था। उन्होंने अपने दिन की शुरुआत सुबह 4 बजे से करनी शुरू की, ताकि घर के काम पूरे कर अभ्यास के लिए समय निकाला जा सके।
प्रतिभा प्रतिदिन दो से चार घंटे तक शूटिंग का अभ्यास करती हैं। उनके अनुसार, जीत और हार दोनों खेल जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन धैर्य, आत्मविश्वास और निरंतर परिश्रम ही खिलाड़ी को आगे बढ़ाता है। कई उतार-चढ़ाव के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रहीं।
जिले और महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं प्रतिभा सिंह
प्रतिभा सिंह की कहानी यह साबित करती है कि उम्र, जिम्मेदारियां और परिस्थितियां यदि मजबूत इरादों के आगे खड़ी हों, तो भी सफलता संभव है। बेटी के लिए उठाया गया एक कदम खुद मां की पहचान बन गया और आज वह सागर जिले की बेटियों और महिलाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी हैं।
आलोचनाओं को पीछे छोड़ प्रतिभा सिंह का अंतर्राष्ट्रीय गोल्ड का सपना
खास बात यह है कि वर्ष 2022 में जब प्रतिभा सिंह ने शूटिंग की शुरुआत की थी, तब उन्हें लगातार नकारात्मक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। कई लोग उनसे कहते थे कि दो बच्चों की मां होने के कारण अब उनके लिए इस खेल में आगे बढ़ना संभव नहीं है। यहां तक कि यह भी कहा गया कि भले ही वे निशाना साधना सीख लें, लेकिन अभ्यास के लिए पर्याप्त समय निकाल पाना उनके लिए असंभव होगा। इन सभी आशंकाओं और तानों को प्रतिभा सिंह ने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति और अनुशासन से पूरी तरह गलत साबित कर दिया।
आज वे न केवल लगातार अभ्यास के लिए समय निकाल रही हैं, बल्कि प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपने प्रदर्शन से आलोचकों को करारा जवाब भी दे रही हैं। प्रतिभा सिंह का सपना अब यहीं तक सीमित नहीं है। उनका लक्ष्य भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतना है और उन्हें पूरा विश्वास है कि निरंतर मेहनत और समर्पण के बल पर वे इस सपने को शीघ्र साकार करेंगी।
संकल्प हो मजबूत तो कोई नहीं रोक सकता: प्रतिभा सिंह
प्रतिभा सिंह का मानना है कि आज के दौर में लड़का हो या लड़की, कोई भी व्यक्ति आपकी मंज़िल में बाधा नहीं बन सकता, बशर्ते आपके भीतर आत्मप्रेरणा, दृढ़ इच्छाशक्ति और स्पष्ट संकल्प मौजूद हो। उनके अनुसार, यदि इंसान अपने लक्ष्य को लेकर ईमानदार है और सही दिशा में प्रयास कर रहा है, तो परिवार का सहयोग भी अपने आप मिलने लगता है।
उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी है कि आपका संकल्प सकारात्मक और मजबूत हो। यदि इरादे अडिग हों, तो कोई भी परिस्थिति या व्यक्ति आपके रास्ते में स्थायी रुकावट नहीं बन सकता। अंततः वही लोग अपने लक्ष्य तक पहुंचते हैं, जो मुश्किल हालात में भी पीछे हटने के बजाय आगे बढ़ते रहते हैं।
परिवार का संबल बना सबसे बड़ी ताकत
प्रतिभा सिंह के पति डॉ. अजय सिंह बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिभा का इंडिया टीम में चयन सागर शहर के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। दो बच्चों की मां होने के बावजूद प्रतिभा ने परिवार और खेल के बीच बेहतरीन संतुलन स्थापित किया है। डॉ. अजय सिंह के अनुसार, यह उपलब्धि न केवल प्रतिभा की मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को दबा देती हैं।
प्रतिभा सिंह की यह यात्रा यह साबित करती है कि जब परिवार का साथ, आत्मविश्वास और मजबूत संकल्प एक साथ हों, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता।
(प्रस्तुति -अर्चना शैरी)



