UPSC टॉपर श्रुति आर (AIR 18) ने देश की सबसे बड़ी परीक्षा के लिये अपनी जो तैयारी यहाँ साझा की है वह छात्रों के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है..
कोयंबटूर, तमिलनाडु की इंजीनियरिंग स्नातक श्रुति आर ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 18 हासिल की। उनकी यात्रा धैर्य, सुव्यवस्थित तैयारी और अटूट संकल्प का प्रमाण है। इस विशेष लेख में उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति, इंटरव्यू अनुभव और भावी अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।
UPSC की चुनौती: धैर्य और उद्देश्य की परीक्षा
हर साल भारत के हजारों अभ्यर्थी वर्षों तक अनुशासित अध्ययन करते हैं ताकि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा को पास कर सकें। यह परीक्षा अपने विशाल पाठ्यक्रम, तीव्र प्रतिस्पर्धा और लंबे समय तक धैर्य की मांग के लिए जानी जाती है। कई अभ्यर्थियों को सफलता पाने में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन जो अंततः चयनित होते हैं, वे अनुशासित तैयारी और स्पष्ट लक्ष्य के साथ आगे बढ़ते हैं।
श्रुति की यात्रा: इंजीनियरिंग स्नातक से UPSC टॉपर तक
हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कोयंबटूर से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में स्नातक श्रुति आर ने तीसरे प्रयास में AIR 18 हासिल किया। उनकी यात्रा सावधानीपूर्वक योजना, निरंतर मेहनत और असफलताओं के बावजूद आगे बढ़ने के साहस को दर्शाती है। सुरक्षित नौकरी छोड़कर उन्होंने भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक को चुना और साबित किया कि दृढ़ संकल्प और सोच-समझकर बनाई गई रणनीति सफलता दिला सकती है।
प्रारंभिक जीवन और शैक्षणिक आधार
कोयंबटूर में जन्मी और पली-बढ़ी श्रुति एक ऐसे वातावरण में बड़ी हुईं जहाँ शिक्षा को अत्यधिक महत्व दिया जाता था। उनके पिता एक कॉलेज प्रिंसिपल हैं और उनकी माँ गृहिणी हैं। परिवार से मिले शैक्षणिक संस्कारों ने उन्हें बचपन से ही उत्कृष्टता की ओर प्रेरित किया। इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने थोड़े समय के लिए नौकरी की, लेकिन कॉलेज के दिनों में ही सिविल सेवा में जाने का विचार मन में बैठ गया था।
सिविल सेवा का मार्ग खोजते हुए
महामारी के दौरान श्रुति ने विभिन्न करियर विकल्पों पर विचार किया और महसूस किया कि जन प्रशासन ही वह क्षेत्र है जहाँ वे सार्थक योगदान दे सकती हैं। शासन और जमीनी विकास पर शोध करते हुए उन्हें लगा कि सिविल सेवा समाज की सेवा करने का सबसे सीधा मार्ग है। इसी स्पष्टता के साथ उन्होंने नौकरी छोड़ दी और UPSC की तैयारी में पूरी तरह लग गईं।
तीसरे प्रयास में सफलता
पहले दो प्रयासों में वे प्रीलिम्स पार नहीं कर सकीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और मेन्स विषयों, वैकल्पिक पेपर और उत्तर लेखन पर ध्यान केंद्रित करते हुए तैयारी जारी रखी। इस निरंतरता ने उनकी नींव मजबूत की। “जब प्रीलिम्स नहीं हुआ, तब भी मैंने मेन्स की तैयारी जारी रखी ताकि मौका मिलने पर मैं तैयार रहूँ,” उन्होंने बताया। तीसरे प्रयास में उन्होंने प्रीलिम्स पास किया, मेन्स में अच्छा प्रदर्शन किया और इंटरव्यू में भी सफलता पाई।
परिणाम का अविस्मरणीय दिन
श्रुति उस दिन ट्रेन में यात्रा कर रही थीं जब UPSC परिणाम घोषित हुए। “मैंने ट्रेन में ही PDF खोला, नाम खोजा और पहले पन्ने पर अपना नाम देखकर खुशी से भर गई। यह मेरे और मेरे परिवार के लिए अविस्मरणीय क्षण था,” उन्होंने याद किया।
कोचिंग और स्व-अध्ययन का संतुलन
तैयारी के दौरान उन्होंने कोचिंग और स्व-अध्ययन दोनों का सहारा लिया। शुरुआत में वे दिल्ली गईं और दो वर्षों तक फाउंडेशन कोर्स किया। बाद में व्यक्तिगत कारणों से कोयंबटूर लौटकर स्वतंत्र रूप से पढ़ाई जारी रखी। प्रीलिम्स पास करने के बाद उन्हें तमिलनाडु सरकार की “नान मुदलवन नंगल योजना” से सहायता मिली, जिसमें आवास, भोजन और शैक्षणिक मार्गदर्शन दिया जाता है। इसी योजना ने उनके इंटरव्यू की तैयारी में भी मदद की।
तैयारी के लिये सही रणनीति
श्रुति ने अधिक संसाधनों के बजाय विषयों में स्पष्टता पर ध्यान दिया। मेन्स के लिए उन्होंने वैकल्पिक विषय को प्राथमिकता दी और सुबह के समय पुनरावृत्ति व नोट्स सुधार पर ध्यान केंद्रित किया। उत्तर लेखन उनकी तैयारी का मुख्य हिस्सा रहा। “नियमित उत्तर लेखन ने मुझे विचारों को व्यवस्थित करने और सीमित समय में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में मदद की,” उन्होंने कहा।
पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का महत्व
प्रीलिम्स के लिए उन्होंने पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का गहन विश्लेषण किया। उन्होंने पैटर्न समझने के लिए पिछले दस वर्षों के प्रश्नों का अध्ययन किया और उन पर नोट्स बनाकर बार-बार पुनरावृत्ति की। “पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र परीक्षा की दिशा बताते हैं और तैयारी को अधिक प्रभावी बनाते हैं,” उन्होंने समझाया।
यादगार इंटरव्यू अनुभव
उनका UPSC इंटरव्यू सौहार्दपूर्ण और रोचक रहा। पैनल ने उनके शौक पर प्रश्न पूछे, जिनमें सिलंबम भी शामिल था — तमिलनाडु की पारंपरिक मार्शल आर्ट, जिसमें वे चोलन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा मान्यता प्राप्त विश्व रिकॉर्ड धारक हैं। जब उनसे पूछा गया कि कोविड न होता तो क्या वे सिलंबम का अभ्यास करतीं, उन्होंने उत्तर दिया, “हाँ, मैं इसे फिर भी करती क्योंकि यह मुझे वास्तव में आनंद देता है।”
UPSC यात्रा से सीख
श्रुति मानती हैं कि धैर्य सबसे महत्वपूर्ण रहा। परीक्षा लंबी अवधि तक निरंतर प्रयास की मांग करती है और प्रगति धीरे-धीरे होती है। “इस परीक्षा में सुधार क्रमिक रूप से होता है, इसलिए अपनी तैयारी पर भरोसा करना बेहद जरूरी है,” उन्होंने कहा।
छात्रों के लिए सुझाव
वे अभ्यर्थियों को सक्रिय अध्ययन अपनाने की सलाह देती हैं। उनका मानना है कि पढ़ना, याद करना, पुनरावृत्ति करना और दोहराना — यह चक्र समझ को मजबूत करता है। वे यह भी कहती हैं कि UPSC तैयारी केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सही मानसिकता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
श्रुति आर की यात्रा यह दर्शाती है कि UPSC में सफलता धैर्य, स्पष्टता और अनुशासित तैयारी से मिलती है। उनकी कहानी अभ्यर्थियों को प्रेरित करती है कि वे धैर्य रखें, अपनी मेहनत पर विश्वास करें और आत्मविश्वास के साथ परीक्षा का सामना करें।
(अर्चना शेरी)



