मैं हूँ निशा। जब मेरी शादी तय हुई मेरे पापा बहुत ज्यादा खुश थे होते भी क्यों न, इतना अच्छा लड़का घरबार जो मिला था। लड़का तीन भाइयों मे सबसे छोटा था ,सास थी नहीं ,ससुर दोनों बड़े भाई गांव मे खेती किसानी करते थे ।गांव मे अस्सी बीघा जमीन थी।दोनों ननदों की शादी हो चुकी थी।लड़के की सरकारी नौकरी थी और क्या चाइए था।
मम्मी ने तो दबे स्वर मे कहा भी था कि जी देख लो अभी निशा इतनी बड़ी भी नहीं हुई है की शादी की इतनी जल्दी की जाये पर पापा जी को लड़का इतना ज्यादा पसंद था कि उन्होने मम्मी से कहा शादी तो करनी ही है लड़का इतना अच्छा है बड़ो का कितना आदर करता है । मेरे सामने तो बोलता भी नहीं है हमारी बिटिया उसको पसंद भी है, फिर शहर मे नौकरी है तुम देखना हमारी बिटिया राज करेगी।फिर रिश्ता भी मेरे चाचाजी लेकर आये हैं तुम तो जानती हो उनकी पारखी नज़र को, मम्मी ने कहा देख लो जी जैसा आपको ठीक लगे।
मैं पापा के बहुत ही क्लोज थी इसलिए पापा को पता था कि लड़का मुझे भी पसंद है । बस बज गयी शहनाई और मैं दिल मे अरमान लेकर ससुराल आ गयी ।दो चार दिन तो रस्मो रिवाज़ मे ही बीत गए। सूरज को पति रूप मे पाकर मैं अपनी किस्मत पर इतरा रही थी जैसा नाम वैसा ही तेज था इनके चेहरे पर.. जब कनकी नज़रो से सूरज मेरी तरफ देखते तो मेरी नज़रें शर्म से झुक जाती तब मैं मन ही मन सोचती मोती दान किये होंगे तब ऐसा पति मिला है ।ऐसा मेरी दादी कहती थी जब कभी भी किसी के केयरिंग और प्यार करने वाले पति को देखती थी।
एक सप्ताह बाद ये मुझे अपने साथ शहर ले आए जहां इनकी पोस्टिंग थी। जिंदगी हंसती खेलती चल रही थी। ससुर जी कभी कभी रहने के लिए हमारे पास आ जाते थे बच्चों से बहुत लगाव था उनको.. मुझे भी बिल्कुल बेटी की तरह प्यार करते थे हमेशा मुझसे पूछते रहते थे कि सूरज तुमको परेशान तो नहीं करता बहु अगर तुमको जरा भी परेशान करे तो मुझे बताना।मैं भी बस इनकी तरफ देखकर मुस्कुराती रहती.
उम्र हो जाने के कारण सुसुरजी की तबियत खराब रहने लगी थी इसलिये अब मेरे पास उनका आना कम हो गया था फिर एक दिन खबर आई कि वो नहीं रहे उनके जाने से मुझे बहुत ही दुःख हुआ क्योंकि मैं अपने दिल की सब बात उनसे कह लेती थी ।उनके जाने के बाद सब कुछ बिखरने लगा क्योंकि उनकी वजह से सब जुड़े हुए थे ।गांव की जमीन जो ससुरजी के नाम थी उसको बड़े जेठ अपने नाम करवाना चाहते थे ये तो कुछ बोलने से रहे इसलिए मैंने सोचा इनसे बात करूं।
मैंने सूरज से जब इस संबंध में बात करनी चाही तो इन्होंने एकदम से मुझे बोला तुम्हे हमारे घर के मामलों में बोलने की कोई जरूरत नहीं है। मैं तो यह बात सुनकर ही सोच मे पड़ गयी और सूरज का बदला हुआ रूप देख कर सन्न रह गई। मेरा मूड बहुत ज्यादा खराब हो गया और मैं सोचने लगी जिस घर को मैं आज तक अपना समझती रही उस घर में मुझे अपनी बात रखने का भी कोई अधिकार नहीं है । मैं क्यों ना बोलूं ? आखिर मेरे बच्चों के हक का सवाल है।
ये तो कह कर ऑफिस निकल गए लेकिन मेरा मन किसी भी काम में नहीं लग रहा था । सिर में बहुत दर्द हो रहा था तभी मेरे पापा का अचानक फोन आ गया ।पापा जी मेरी आवाज सुनकर तुरंत समझ गए कि जरूर कोई बात है? उन्होंने मुझसे पूछा बेटा क्या हुआ ? कुछ बात है क्या ? मैंने कहा नहीं पापा जी कोई बात नहीं है ।मैं पापा के काफी क्लोज थी इसलिए पापा समझ गए की हो ना हो जरूर कोई बात है?
उन्होंने दोबारा जब मुझसे पूछा कि बेटा बताओ कुछ तो बात है तो मैंने उन्हें सूरज से हुई सभी बातें विस्तार से बता दी । मैंने पापा जी से पूछा कि पापा जी क्या मुझे कोई अधिकार नहीं है?. बोलने का ,अपनी बात रखने का ,पापा जी ने मुझसे कहा बेटा तू चिंता मत कर ..मैं सूरज से इस संबंध में बात करूंगा ।तुझे पूरा अधिकार है अपनी बात कहने का।
शाम को ही पापा जी का फोन आया सूरज के लिए उन्होंने सूरज से कहा बेटा मैं यह क्या सुन रहा हूं । तुमने निशा का दिल दुखाया यह कहकर कि तुम्हें कोई हक नहीं है हमारे घर के मामले में बोलने का तो बेटा मैंने अपनी बेटी की शादी सिर्फ तुम्हारी नौकरी देख कर ही तय नहीं की थी। घर बार देख कर भी की थी। तुम्हारा घर क्या उसका घर नहीं है क्या उसका वहां कोई अधिकार नहीं है।
फिर मेरे नाती नातिन का भी पूरा अधिकार है सब कुछ देख कर ही मैंने अपनी बेटी तुम्हें ब्याही थी। तुम उसके साथ ऐसा व्यवहार करोगे । ये मैं सोच भी नहीं सकता था ।पापाजी के तेवर देखकर सूरज को अपनी गलती का एहसास हो गया था उसने पापा जी से कहा।
पापा जी मेरा मतलब वह नहीं था आगे से ऐसी कोई बात नहीं होगी। पापा जी को सूरज के व्यवहार के बारे में पता ही था उन्हें पूरा भरोसा था कि सूरज उनकी बातों का मान रखेगा। सूरज ने भी पापा जी की बात का मान रखा और मुझसे सॉरी बोला और कहा मैं तो अपने बड़े भाई से कुछ नहीं कह सकता ।तुम जो कुछ भी कहना चाहती हो कह सकती हो और अपनी बात रख सकती हो । मैं तुमको कुछ नहीं कहूंगा । मैंने भी अपनी बात रखने का फैसला किया।मेरे बात करने से ससुरजी की जमीन तीनो भाइयों के नाम हो गयी।
(प्रस्तुति- अनीता सिंह)