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Monday, February 9, 2026

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Poetry by Suman Parijat – जब भी जाना चुपचाप चले जाना !

Poetry by Suman Parija: मिलन का अंत बिछोह में ही होता है जिस तरह बिछोह के बाद फिर किसी दिन मिलन होता है..भावों का चित्र देखिये..

जब भी जाना
चुपचाप चले जाना

उदास हो लूंगा
मैं भी चुपचाप
पता चलेगा जब

उसको क्या कहूंगा
जब तुम्हारे जाने के बाद
आयेगी याद तुम्हारी

बीते मौसम को
फिर से आना है
पर इस बार
अकेले आना है

खालीपन को गले लगा कर
खाली हो जायेगा
मेरा कमरा
मेरे सीने में

तकलीफ तो देता है
किसी का न होना

और फिर तुम तो
किसी नहीं हो न !

(सुमन पारिजात)

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