Poetry by Suman Parijat: ‘..शब्द हार जाते हैं भावों के आगे.. वो चित्र नहीं बना पाते हृदय में ..जो भावों ने बनाये हैं..’ पढ़िये प्रेम के अनंत आकाश में उड़ान भरती प्रेम की कलम को..
शब्द हार जाते हैं
भावों के आगे
वो चित्र नहीं बना पाते
हृदय में
जो भावों ने बनाये हैं
प्रेम को यद्यपि
नहीं है आवश्यकता
शब्दों की
उसके लिये
भाव ही पर्याप्त होते हैं
पर प्रेम के
हर गीत में
शब्द भी होंगे
स्वर भी
और भाव भी
किन्तु कैसे दिखाऊँ तुमको
मैं अपना हृदय
अच्छा लगता है
तुम्हें सोचना
तुम्हारी कल्पना करना
जिस तरह अपने आराध्य
का क्षण-प्रतिक्षण
स्मरण करना
प्रेम उपलब्धि है
तो वरदान भी
इस विषपायी जगत में
जीवन की सुधा भी
और जीवन भी !!
(सुमन पारिजात)



