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Thursday, January 15, 2026

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Poetry by Suman Parijat: हास्यकवि ये दिलजला – कोई नहीं मिला कोई नहीं मिला !

 

जब चाहत थी जब सोच भी थी
कोई नहीं मिला कोई नहीं मिला
अब खाट पे अपनी लेटे हैं
कोई नहीं मिला कोई नहीं मिला !

काश, कोई ऐसी मिल जाती
हमें देख कर गिर जाती
टशन हमारा देख के जो
पीछे दौड़ी दौड़ी आती

जो मिलीं चतुर सब नार मिलीें
इस पार मिलीं उस पार मिलीें
हम जाल बिछाये कब से हैं
कोई नहीं मिला कोई नहीं मिला !

जो चपल चंचला चाँदी हो
जो सन्नाटे में आंधी हो
युद्ध-भरी इस दुनिया में
जो शांत अहिंसक गाँधी हो !

जो दिन बनकर के साथ चले
जो आँगन में हर रात ढले
अब क्या पछतायें हाथ मलें
कोई नहीं मिला कोई नहीं मिला !

जो हाथ में डाल के हाथ चले
पार्टी में भी साथ चले
चटर पटर अंग्रेजी बोले
देखन वाले लोग जलें !

जिसे बिन फेरों के ब्याह लूँ मैं
जिसे बिन माँगे ही माँग लूँ मैं
फिर साथ में अपने बाँध लूँ मैं
कोई नहीं मिला कोई नहीं मिला ! 

जो मेरे बच्चों की अम्मा हो
मेरे साथ में छम्मा छम्मा हो
बस मुझ पर अपना प्यार लुटाना
उसका फुल टाइम का जिम्मा हो !

अँधियारे में कोई शम़्मा जले
इस सेहरा में कोई फूल खिले
हम मार कुन्डली बैठे हैं
कोई नहीं मिला कोई नहीं मिला !

जो सिगरेट के पैकेट न धोंके
बोतल ले के ताल न ठोंके
गाली से अनजान हो बिलकुल
ऐसी कोई मिल जाये बुलबुल !

दुनिया भर को बांटे हो
बस हमको ही डांटे हो
कुछ देदो हमें भी ऊपर वाले
कोई नहीं मिला कोई नहीं मिला !

ये उमर तो सारी बीत गई
ये जनम भी लगभग कट ही गया
प्रभु नेक्स्ट बर्थ की बुकिंग करो
इस प्राणी पर करो दया !

कोई सखी नहीं न गर्लफ्रेन्ड
बेकार लगे अब हर फ्रेन्ड
भीड़ भरी इस दुनिया में
कोई नहीं मिला कोई नहीं मिला !

(सुमन पारिजात)

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