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Saturday, February 28, 2026

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Poetry by Suman Parijat: तुम्हारे प्यार का मौसम 

तुम्हारे प्यार का मौसम 

जहां कोई नहीं होता
जहां कुछ भी नहीं होता
मुझे महसूस होता है
तुम्हारे प्यार का मौसम !!
राहें जब डराती है
मुश्किलें बढ़ती जाती हैं
जब भी लड़खड़ाता हूँ
या थोड़ा हार जाता हूँ
मेरे हमनवां जैसा
वो मेरा हमसफ़र बन कर
मेरे ही साथ चलता है
तुम्हारे प्यार का मौसम !!
कहीं मैं रुक नहीं जाऊं
कहीं मैं झुक नहीं जाऊं
जीवन के समर में मैं
कहीं कुछ चुक नहीं जाऊं
मैं प्यासा एक पथिक जैसे
वो आशा के चषक जैसा
मेरी हिम्मत की हाला है
तुम्हारे प्यार का मौसम !!
(पारिजात)

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