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Thursday, February 12, 2026

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Poetry by Medha Medha:  क्या तुम वादा करते हो❓

Poetry by Medha Medha: प्रेम भावों का बंधन है तो अपेक्षाओं का भी है..पढ़िये वादे की मांग करती अपेक्षा मेंधा मेधा की कलम से..

 क्या तुम वादा करते हो❓
तुम कहते हो,
कि तुम्हें प्रेम है मुझसे,
जो कल किसी और से था,
आज किसी और से है,
शायद कल किसी और से होगा।
वही वही सूत्र दुहराए जाएंगे,
वही फॉर्मूला लगाया जाएगा,
वही फूलों के गुलदस्ते,
वही मन को छूते तोहफे,
वही मुझे निहारती तुम्हारी आँखें।
तुम्हारी मनभावन बातें,
हृदय को छूते भाव प्रणव स्पर्श,
चर्चे किस्सों और किताबों के,
सुनाना प्रेम में डूबी कविताएं,
और डूबते सूर्य के समक्ष छत पर
वह समर्पण भाव तुम्हारा।
आधी रात को बजता फोन,
हृदय को झंकृत करता वह प्रेम धुन,
निहारना चांद को साथ साथ
अपने अपने शहरों में बालकनी में,
और बातें स्वप्निल दुनिया की।
इस प्रेम की मेरी दुनिया में,
बस एक सवाल है,
कल जो तुम्हारी वर्तमान थी,
आज वह इतिहास है,
कल मैं भी इतिहास नहीं बनूंगी,
क्या तुम वादा करते हो?

(मेधा मेधा)

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