Poetry by Manisha Gupta: भावनाओं के अनंत आकाश में शीतल पवन सी बहती हुई एक कविता..
मैं एक पहेली
मेरे हल हो तुम !
पावन गंगाजल हो तुम
मेरी ज़िन्दगी के सारे प्रश्नों के
हल हो तुम !
कठिन प्रश्नपत्र सी ज़िन्दगी
उत्तर कुंजिका से सरल हो तुम
मैं गंभीर गहरी समुंदर सी
मेरी मचलती उफनती लहर हो तुम !
मैं ख़ामोश सिमटी धरती सी
मेरे गर्वीले उच्च अनंत आकाश हो तुम !
मैं अपनी स्वप्निल दुनिया की साम्राज्ञी
मेरे मस्तक का चमकता रत्नजड़ित ताज हो तुम !
हां मेरे आज और कल हो तुम
मेरे दिल में गुंजित राग हो तुम !
मोह और नेह से भरे अनुराग हो तुम !
मेरे अस्तित्व मेरी पहचान मेरे संसार मेरे राम हो तुम !!
(मनीषा)



