Poetry by Kamla Rani Singh: प्रेम गहन विषय है हर हृदय का..जिसमें चाहे तो समस्त सृष्टि समा जाये..या फिर एक व्यक्ति के लिये भी स्थान नहीं बनता..
मैने कभी प्यार में कोई उम्मीद नहीं रखी
तुम्हे प्यार करने का फैसला मेरा था
तुम्हारा इंतजार करने का फैसला भी मेरा था
प्यार में अगर कोई उम्मीद रखी जाए तो फिर वो प्यार कहां हुआ
मैने कभी तुम्हे बांध कर नहीं रखना चाहा खुद के साथ
क्योंकि बंधन अक्सर गांठ बन जाता है और हम कितनी भी कोशिश करे उस गांठ को कभी खोल नहीं पाते
प्यार में पीड़ा होना स्वाभाविक है
पर फिर भी प्यार दर्द नहीं है
प्यार तो मन और आत्मा दोनों को शुद्ध करता है
तुम्हारा जाना भी मैने सहर्ष स्वीकार किया
हर बार तुम्हारी एक मुस्कुराहट पर मै बिकती चली गई
तुम्हारे दिए उस एक गुलाब से मै फिर बिक गई
तुम्हारे वादों पर बार बार निसार हुई
क्योंकि मैं प्रेम में थी
सिर्फ तुम्हारे साथ
रहूंगी ताउम्र सिर्फ तुम्हारी
तब तक जब तक तुम आ ना जाओ खुद मुझ तक…
(कमला रानी सिंह)