Namaskaar: हम मिलते हैं किसी से तो अपनेआप मुँह से निकल जाता है – नमस्ते जी.. हमें जानना चाहिये इसका अर्थ एवं इसका प्रयोजन भी..
नमस्ते भारतीय संस्कृति में सम्मानपूर्वक अभिवादन करने का तरीका है ।यह केवल एक सामाजिक अभिवादन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक मान्यता है कि हर व्यक्ति के अंदर दिव्यता (ईश्वरीय अंश) होती है, जिसे हम नमन करते हैं; यह हाथ जोड़कर, हथेलियों को छाती के पास रखकर, उंगलियाँ ऊपर की ओर करके किया जाता है।
नमस्ते करने के मुख्य कारण:
आध्यात्मिक अर्थ: यह स्वयं और दूसरों में विद्यमान ईश्वर (दिव्यता) को स्वीकार करने का प्रतीक है, एक आत्मा का दूसरी आत्मा से आभार व्यक्त करना है।
सम्मान और विनम्रता: यह किसी के प्रति आदर और श्रद्धा दिखाने का एक तरीका है, जो रिश्तों में मजबूती लाता है।
सांस्कृतिक पहचान: यह भारतीय उपमहाद्वीप की गहरी सांस्कृतिक और पारंपरिक प्रथा है, जो एकता और विनम्रता के मूल्यों को दर्शाती है।
वैज्ञानिक/शारीरिक लाभ: हाथों को जोड़ने से उंगलियों के एक्यूप्रेशर पॉइंट्स पर दबाव पड़ता है, जिससे दिमाग और शरीर पर सकारात्मक असर होता है, ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है और मन शांत होता है।
स्वच्छता: हाथ मिलाने (Handshake) के बजाय नमस्ते करने से कीटाणुओं का आदान-प्रदान नहीं होता, जो स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।
अभिवादन और विदाई: इसका उपयोग दिन के किसी भी समय किसी का स्वागत करने या अलविदा कहने के लिए किया जाता है।
संक्षेप में, नमस्ते एक गहरा अर्थ रखने वाला, सम्मानजनक और स्वास्थ्यवर्धक अभिवादन है जो भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है।
(प्रस्तुति -आभा रानी)



