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Thursday, March 26, 2026

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Love Storyiyan- 4: शमा नरुला और आलाप भान

Love Storyiyan- 4: सोशल मीडिया पर भी एक जिन्दगी होती है लोगों की बहुत अपनी और बहुत निजी..वैसा ही कुछ है इस सोशल कहानी में..

दिल्ली की हलचल भरी शामों के बीच, ऑफिस की थकान और शहर की भीड़ से दूर, दो दिल धीरे-धीरे एक-दूसरे की तरफ़ खिंचते जा रहे थे – एक थी शमा नरुला और एक था आलाप भान। सुबह शाम सोशल मीडिया पर होने वाली उनकी चैट अब उनकी साँसों की तरह ज़रूरी होती जा रही थीं।

एक शाम, जब आसमान गुलाबी रंग में डूब रहा था, आलाप ने स्क्रीन पर उभरे शब्दों में अपनी बेचैनी बयां की –
“छुपी छुपी खड़ी हो.. जरूर कोई बात है। क्या हुआ – बहुत बिज़ी हो आजकल? तुम्हारी शकल देखने को तरस जाता हूं।”

कॉफी मग को हाथ में लिए, खिड़की से बाहर झाँकती शमा हँसी और टाइप किया –
“आप भी तो कम बिज़ी नहीं हो। ऐसे कह रहे हो जैसे रोज अपनी शकल दिखा देते हो।”

फिर शाम तक खामोशी रही दोनो तरफ.. अचानक फोन फिर से चमका –
“Hi”
फिर एक के बाद एक मैसेज –
“सुनिये अपना कॉन्टेक्ट नंबर दीजिए। मिस हो गया। अरे बाबा कहाँ हो जमीन पर उतर आओ मेरे ओली ” – ये शमा बोली

अगली सुबह, आलाप ने नींद भरी आँखों से मुस्कुराते हुए लिखा –
“गुड मॉर्निंग शमा। कैसी हो तुम? 98…….98 ये लो नंबर।”

शमा के होंठों पर मासूम मुस्कान आई। उसने दिल से जवाब दिया –
“शुक्रिया मेहरबानी। GM डियर। I m fn। और आप कैसे हो..और हाँ सुनो, मेरे ओली। लव यू।”

आलाप हँस पड़ा, मानो उसका दिन बन गया हो –
“ओह्हो। क्या बात है। आज तो मेरे भाग जाग गए।”

शमा की उँगलियाँ स्क्रीन पर दौड़ीं –
“ नहीं मुझे आपकी बहुत याद आ रही थी कल से ओली। मैंने आपका निकनेम ओली रखा है, ये नया नाम भी आपके जैसा क्यूट है।”

आलाप ने शरारती अंदाज़ में लिखा –
“ओह थैंक्स डियर। अब तुम्हारा भी कोई अच्छा सा नाम सोचता हूँ। जैसे ओली की भोली – कैसा रहेगा”
शमा ने खिलखिलाते हुए जवाब दिया –
“सुनो प्लीज मेरी बात तो सुनो, मैं आपसे जल्दी मिलना चाहती हूँ।”

मोबाइल स्क्रीन पर आलाप की आँखें ठहर गईं। उसने तुरंत लिखा –
“मैने कहां मना किया – तुम ही बताओ कब मिलना है।”
शमा ने लिखा –
“बताती हूँ।”
और आलाप –
“हाँ ओके।”

”सुन लो ध्यान से, शाम ढलने तक तुम्हारे सीने से लगी रहूंगी”

”ओहो, ऐसा क्या ! मुझे प्रतीक्षा रहेगी”

दो दिन बाद बातों का सिलसिला अचानक किताबों तक चला गया।
आलाप ने कहा –
“विद्योत्तमा। नहीं पढ़ा लेकिन नाम सुना था बचपन में।”
शमा ने जवाब दिया –
“ओके। मोहन राकेश द्वारा रचित है। विद्योत्तमा उनकी पत्नी थीं…”

आलाप थोड़ा सोचकर बोला –
“हो सकता है.. मल्लिका के विषय में ज्ञान नहीं।”

शाम को शमा ने फिर चिढ़ाते हुए स्माइली भेजी –
“अभी भी बिजी हैं? कितना बिजी रहते हो डियर।”
आलाप –“हाँ यार आज दो से दस की शिफ्ट है मेरी।”
शमा – “ओह। 10 तक वर्क लोड।”
आलाप – “अरे कल सुबह की शिफ्ट रखूँगा। 8 से 4 की। फिर दिन भर अपना ही होगा।”
शमा – “ओके। वाह। फिर ढेर सारी बातें करेंगे”
आलाप – “हाँ बिल्कुल।

अगले रविवार को पहल आलाप ने की…मैसेज लिखा शमा को –

”हाय शमा, मेरी इतनी याद आ रही थी कि आधी रात को फोन कर दिया तुमने मुझे”
शमा – “हाँ किया। मुझे नींद नहीं आ रही थी। सोचा तुमसे बात कर लूँ। सॉरी डिस्टर्ब किया तुम्हें।”

आलाप का चेहरा नरम हो गया। उसने लिखा –
“ना ना कभी डिस्टर्ब नहीं होता मैं। जब तुम बात करती हो तो खुशी होती है। अब फिर कभी रात को बात करनी हो तो मुझे पहले मैसेज कर देना।”

शाम तक जवाब नहीं आया शमा का..फिर रात को सोने से पहले उसने रात की खामोशी में धीरे से लिखा –
“हाय। सॉरी। अब नहीं करूँगी आपको लेट नाइट कॉल।”
आलाप का जवाब थोड़ी देर बाद आया – “अरे नहीं। ऐसी बात नहीं।”

फिर आलाप ने दिल से कहा –
“थैंक्स डियर। मुझे कभी गलत मत समझना। कोई गलतफहमी हो तो मुझसे पूछ लेना प्लीज। मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता।”

उसकी यह पंक्ति जैसे शमा के दिल पर लिख गई। स्क्रीन से झरते शब्द अब उनके बीच सिर्फ मैसेज नहीं रहे, बल्कि उनकी मोहब्बत की धड़कन बन गए। चैट जैसे कोई रौशनी थी जो दो दिलों के अंधेरे को मिटा रही थी..ताजगी की महक के साथ!

(सुमन पारिजात)

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