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Thursday, March 19, 2026

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Love Storiyan -6: संध्या और प्रभात – एक दिल से दिल की बात

Love Storiyan -6: संध्या और प्रभात प्रेमी अधिक थे या मित्र – समझने का प्रयास कीजियेगा उनकी दिल से दिल की बात सुन कर..

एक सुबह लगा संध्या को कि सारी दुनिया रोमान्टिक हो गई है..क्योंकि संध्या के दिल में रोमांस का म्यूजिक बज रहा था। प्रभात की याद आते ही उसने लिख दिया मैसेज सुबह सुबह उसको।

उस सर्द सुबह… मोबाइल की स्क्रीन पर एक प्यारा सा मैसेज चमकता है — “हाय प्रभात”।
प्रभात को दिखाई दी मुस्कुराती हुई संध्या .. उसने जवाब दिया — “गुड मॉर्निंग संध्या”

जवाब तुरंत आया जैसे संध्या तैयार बैठी थी – ”वेरी गुड मॉर्निंग डियर !”

प्रभात को बहुत प्यारा लगा उसका यूं ‘डियर’ लिखना.. वैसे शुरू में कुछ दिन पहले तक प्रभात ही डियर लिखता था संध्या को

दिनभर की भागदौड़ में कुछ इमोजी, कुछ GIF, और फिर वही सादगी भरी नमस्ते । शाम होते-होते फिर से एक मैसेज आता है — “हाय”, “बिजी रहते हो बहुत”, और फिर एक प्यारी सी मुस्कान ।

संध्या और प्रभात का मिलन आकाश में नहीं ऑनलाइन होता था लगभग हर दिन।

एक दोपहर लिखी हुई आवाज आई प्रभात की — “हाय स्वीटहार्ट”।
संध्या ने मुस्कुरा कर पूछा — “क्या कर रहे हैं जनाब?”
जवाब आया — “तुमसे प्यार… और क्या!” (हल्की हँसी की धुन)

संध्या ने ताना दिया — “बात करने का वक्त नहीं, प्यार क्या कीजिएगा?”
प्रभात मुस्कुरा दिया
उसने पूछा — “कैसी हो तुम?”
संध्या का जवाब आया — “तुम जैसी
साथ में एक मुस्कान भी आई संध्या की
प्रभात मुस्कुराया – “ओह्हो, दिल ले लिया… अब तो जान भी ले लोगी!”
-“दे दीजिए दिल भी जान भी ”

प्यार का इमोजी संध्या ने भेजा, पसंद आया प्रभात को

प्यार के इमोजी के साथ उसने भी लिखा –

“दे दिया दिल.. और अब अपनी ज़िंदगी भी दे दी अपनी प्रेमिका को ”

प्रभात के दिल में प्रेम का संगीत बजने लगा।

फिर बातों का रंग और गहरा होता है… “कितनी बातें बनाते हो तुम…” -संध्या ने लिखा एक दिन।
जवाब आया – “क्योंकि तुमसे प्यार है इसलिए ..प्यारी बातें बनाता हूं”

“पति जैसी बातें करते हो कभी कभी…”
“पति भी बन जाऊँगा तुम्हारा कभी न कभी !”
मतलब, कैसे?
“जब हम अकेले होंगे उस समय” -प्रभात ने लिखा
”एक दिया जलाकर हाथ पकड़ के सात फेरे ले लेंगे… भगवान का नाम लेकर… बस हो गया! मैं तुम्हारी माँग में सिंदूर भर दूंगा … फिर तुम मेरी किस ले लेना जैसे चर्च में होता है.. हो गया, बस!”

संध्या को शादी की शहनाई की धुन सुनाई दी अपने कानों में।

”बाजा बाराती कैसे आयेंगे?”- भोलेपन से पूछा संध्या ने।

पूरी गंभीरता से कहा प्रभात ने – “हम दोनों ही हैं अपना बाजा भी और बाराती भी!”

संध्या जैसे सोच में डूब गई – ”ओहह!”
“आई लव यू मेरी संध्या… ऑलवेज़!”
“तुमसे मैं कभी भी जीत नहीं सकती बातों में…”
“हाँ, तुम मुझसे जीत नहीं पाओगी बाँहों में भी!..जब तुमको प्यार करूँगा..” – शरारात से कहा प्रभात ने
“नहीं, वहाँ मैं जीत सकती हूँ!”
“तब तो बहुत खुशी होगी मुझे… तुम मुझे प्यार करते समय हरा देना..”
“बाँहों को मैं आसानी से नहीं छोड़ती..”
“कभी मत छोड़ना प्लीज़!”

ऐसा लगा दोनो को एक दूसरे के दिल की धड़कनें सुनाई देने लगीं।

“हमारे भारत की नारियाँ तो बस प्यार के वक्त आराम करने लग जाती हैं… जो करना है कर लो… वो एक्टिव नहीं होती…”
”औह हां सही कहा” – प्रभात की बात से सहमति जताई संध्या ने
” लेकिन मुझे खुशी है तुम एक्टिव हो माई डियर !”
“पति हो या प्रेमी, कुछ मामलों में लगता है एक ही बात है…लेकिन सच तो ये है कि प्रेमी दिल को सुकून देते हैं और पति टेंशन!”
“मैं वादा करता हूँ — जीवन में कभी टेंशन नहीं दूँगा, बस प्यार ही दूँगा… बहुत सारा!”
ओह..मैं बहुत लकी हूं तुम मुझे मिले..पर भूल मत जाना अपना वादा” – संध्या को प्यारा लगा प्रभात का प्यार भरा वादा।

अचानक संध्या ने पूछा — “घर नहीं गए..अभी तक ऑफिस में हो?”
“20–25 मिनट में जाऊँगा… साढ़े सात बजे के करीब…” “वर्क थोड़ा अधिक है..आज
ठीक है कल मिलती हूं यहीं
-हां लेकिन भूलना नहीं
-क्या?
-मुस्कुराते रहना !
-लव यू प्रभात
-लव यू टू, संध्या !!

(सुमन पारिजात)

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