Generation Alpha: मिलेनियल्स और Gen X की संतानें कैसी होंगी? जानें इस नई पीढ़ी की सोच, तकनीकी आदतें और मानसिक स्वास्थ्य पर असर..
Generation Alpha कौन है?
जनरेशन अल्फ़ा उन बच्चों को कहा जाता है जो 2010 के बाद जन्मे हैं। यह पीढ़ी सीधे तौर पर Generation Z के बाद आती है और अनुमान है कि दुनिया में इनकी संख्या लगभग 2 अरब तक हो सकती है। इन्हें “डिजिटल नेटिव्स” कहा जाता है क्योंकि ये जन्म से ही तकनीक और सोशल मीडिया के बीच बड़े हो रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस पीढ़ी की शुरुआत उसी समय हुई जब iPad और टैबलेट्स लॉन्च हुए थे। यही वजह है कि ये बच्चे पहली ऐसी पीढ़ी होंगे जिन्हें सोशल मीडिया के बिना दुनिया का कोई अनुभव नहीं होगा।
विविधता और समावेशिता का असर
बोस्टन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डेबोरा कार बताती हैं कि जनरेशन अल्फ़ा ऐसे समाज में पल रही है जो पहले से कहीं अधिक विविध और समावेशी है। यही कारण है कि ये बच्चे दूसरों को स्वीकार करने और अलग-अलग पहचान को समझने में अधिक खुले विचारों वाले होंगे। मिलेनियल्स की संतानें इस दृष्टिकोण से उम्मीद जगाती हैं कि समाज और अधिक इन्क्लूसिव और स्वीकार्य बनेगा।
तकनीक से परिभाषित होती पीढ़ी
जनरेशन अल्फ़ा के बच्चे तकनीक के साथ बेहद सहज हैं। ये अपने माता-पिता के iPads पर वीडियो देखते हैं, iPhones पर गाने सुनते हैं और विज़ुअल लर्निंग में विशेष रूप से अच्छे हो सकते हैं। हालांकि, लगातार स्क्रीन टाइम को लेकर वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है। हाल ही में शोध में पाया गया कि छोटे बच्चों में अत्यधिक स्क्रीन टाइम से दिमाग के कुछ हिस्सों का विकास प्रभावित हो रहा है।
सोशल मीडिया और डिजिटल फुटप्रिंट
मैनहैटन साइकोलॉजी ग्रुप की मनोवैज्ञानिक फ्रैंसिन ज़ेल्टसर कहती हैं कि सोशल मीडिया का असर इस पीढ़ी पर पहले की पीढ़ियों से कहीं अधिक है। अब बच्चों का डिजिटल फुटप्रिंट उनके माता-पिता की पोस्ट से ही बनना शुरू हो जाता है। हर तस्वीर और हर शब्द जो ऑनलाइन डाला जाता है, वह उनके भविष्य का हिस्सा बन सकता है। यह जानकारी आगे चलकर उनके करियर, शिक्षा या राजनीति में भी असर डाल सकती है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि माता-पिता को बच्चों से जुड़ी पोस्ट करते समय बेहद सावधानी और जिम्मेदारी बरतनी चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता
मिलेनियल और Gen X माता-पिता मानसिक स्वास्थ्य को लेकर पहले से कहीं अधिक जागरूक हैं। सोशल मीडिया पर “परफेक्ट पैरेंटिंग” की होड़ ने कई माता-पिता को दबाव में डाल दिया है। लेकिन इसी के साथ बच्चों को यह संदेश भी मिल रहा है कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शारीरिक स्वास्थ्य। कई माता-पिता बच्चों को “मेंटल हेल्थ डे” देने की वकालत करते हैं, जिससे जनरेशन अल्फ़ा मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने वाली पीढ़ी बन सकती है।
भविष्य की चुनौतियाँ और पैरेंटिंग
जहाँ मिलेनियल्स ने आर्थिक मंदी के कारण देर से परिवार बसाने का निर्णय लिया था, वहीं जनरेशन अल्फ़ा को क्लाइमेट चेंज जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। पर्यावरणीय संकट और जनसंख्या का दबाव इस पीढ़ी के पारिवारिक निर्णयों को प्रभावित कर सकता है। संभव है कि ये पीढ़ी बच्चों की संख्या कम रखने या परिवार नियोजन को अलग तरीके से अपनाए।
जनरेशन अल्फ़ा को एक ऐसी पीढ़ी माना जा रहा है जो तकनीकी रूप से सबसे अधिक सक्षम, सामाजिक रूप से अधिक जागरूक, विविधता को स्वीकार करने वाली और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने वाली होगी। साथ ही, यह पीढ़ी जलवायु परिवर्तन जैसी जटिल वैश्विक चुनौतियों को भी समझेगी और उनसे निपटने के लिए नए दृष्टिकोण अपनाएगी।
(अर्चना शेरी)



