Biggest Film Producer: वह महिला जिसने 1000 फिल्में बना दीं — जब औरतों को वोट का हक़ भी नहीं था, लेकिन इतिहास ने उसका नाम मिटा दिया..
आज जब हम फिल्में देखते हैं, हमें लगता है कि सिनेमा की शुरुआत कुछ गिने-चुने पुरुषों ने की थी। लेकिन सच्चाई यह है कि दुनिया की पहली कहानी वाली फिल्में एक 23 साल की फ्रेंच लड़की ने बनाईं थीं — और फिर उसका नाम इतिहास से गायब कर दिया गया।
उस लड़की का नाम था — एलिस गाइ-ब्लाशे (Alice Guy-Blaché)।
एक सेक्रेटरी, जिसने कैमरे में कहानी देखी
साल 1894 की बात है। पेरिस में 21 साल की एलिस गाइ एक छोटी कैमरा बनाने वाली कंपनी Gaumont में सेक्रेटरी की नौकरी करती थीं। उस समय कैमरा एक नया आविष्कार था और लोग उससे सिर्फ ट्रेन के आने-जाने, मजदूरों के फैक्ट्री से निकलने जैसे दृश्य रिकॉर्ड करते थे।
लेकिन एलिस ने कैमरे में कुछ और देखा। उसे लगा – इससे कहानियाँ सुनाई जा सकती हैं।
दुनिया की पहली कहानी वाली फिल्म
1896 में एलिस ने अपने मालिक से पूछा – “क्या मैं छुट्टी के दिन कैमरे से एक काल्पनिक कहानी की फिल्म बना सकती हूँ?” मालिक को यह विचार अजीब लगा, लेकिन उसने अनुमति दे दी।
एलिस ने बना डाली दुनिया की पहली कहानी वाली फिल्म – La Fée aux Choux (कैबेज फेयरी)
जिसमें एक परी गोभी के खेत से बच्चों को निकालकर उनके माता-पिता को देती है। यहीं से नैरेटिव सिनेमा (कहानी वाला सिनेमा) शुरू हुआ। पहली महिला फिल्म डायरेक्टर और स्टूडियो हेड
जल्दी ही कंपनी को समझ आ गया कि उनकी सेक्रेटरी कोई साधारण लड़की नहीं, बल्कि जीनियस है।
एलिस को स्टूडियो का हेड ऑफ प्रोडक्शन बना दिया गया -वह दुनिया की पहली महिला फिल्म डायरेक्टर और पहली महिला स्टूडियो हेड बनीं।
अगले 10 सालों में उन्होंने सैकड़ों फिल्में बनाईं।
तकनीक और सोच – दोनों में क्रांति
जब बाकी लोग सिर्फ कैमरा रखकर शूट कर रहे थे, एलिस ने:
क्लोज़-अप, डबल एक्सपोज़र, कलर टिंट, स्पेशल इफेक्ट, और 1906 में आवाज़ वाली फिल्म भी बना दी — जब बोलती फिल्में आने में अभी 20–25 साल बाकी थे। लेकिन सबसे बड़ी बात -वह औरतों की आज़ादी, नस्लभेद, लिंग समानता जैसे मुद्दों पर फिल्में बना रही थीं।
1912 में उन्होंने एक फिल्म बनाई -जिसमें भविष्य दिखाया गया जहाँ महिलाएँ सत्ता में हैं और पुरुष घर संभालते हैं। उस समय महिलाएँ वोट भी नहीं दे सकती थीं।
अमेरिका में अपना स्टूडियो — और 1000 फिल्में
1910 में एलिस अमेरिका गईं और वहाँ अपना खुद का स्टूडियो Solax Studio खोला।
यह हॉलीवुड से पहले अमेरिका का सबसे बड़ा स्टूडियो था।
उनका बोर्ड लगा था -“Be Natural” — स्वाभाविक बनो। 1896 से 1920 तक उन्होंने लगभग 1000 फिल्में बनाईं। यह संख्या Hitchcock, Spielberg और Kubrick — तीनों को मिलाकर भी ज़्यादा है।
फिर सब कुछ छीन लिया गया
हॉलीवुड बनने लगा। बड़े स्टूडियो आए। महिलाओं को बाहर किया जाने लगा। एलिस का स्टूडियो बंद हुआ। पति से तलाक हुआ। फाइनेंस नहीं मिला। और फिर — इतिहास ने उनका नाम मिटा दिया।
उनकी तकनीकें पुरुषों के नाम पर चढ़ा दी गईं। उनकी फिल्मों के क्रेडिट बदल दिए गए। अधिकतर फिल्में नष्ट कर दी गईं। 95 साल की उम्र तक अपनी पहचान के लिए लड़ती रहीं
एलिस आखिरी उम्र तक पत्र लिखती रहीं, भाषण देती रहीं, अपनी आत्मकथा छापी -लेकिन कोई नहीं सुन रहा था। 1980–90 के दशक में जाकर शोधकर्ताओं ने उनकी असली कहानी खोजी।
आज उनकी सिर्फ 150 फिल्में ही बची हैं।
वह सिर्फ सिनेमा की मददगार नहीं थीं -उन्होंने सिनेमा का आविष्कार किया था। कहानी, किरदार, भावनाएँ, संदेश, शैली, स्पेशल इफेक्ट -यह सब सबसे पहले एलिस ने किया।
बाकी लोगों ने सिर्फ उसका श्रेय ले लिया।
अगली बार जब आप कोई फिल्म देखें
तब याद रखियेगा – एक 23 साल की सेक्रेटरी ने कैमरे को सिर्फ मशीन नहीं, कहानी सुनाने का ज़रिया बना दिया था। और उसे यह साबित करने में 95 साल लग गए कि उसने ही यह किया था।
(प्रस्तुति -अर्चना शैरी)



