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Asha Parekh को उस दिन लगा कि शायद वो जीवित यहां से नहीं निकल पायेंगी

Asha Parekh की एक हैरान कर देने वाली याद जो जुड़ी थी मुम्बई से ही..एक दिन ऐसा हुआ कि..

सन 2005 की बात है। उस साल मुंबई में बेतहाशा बारिश हुई थी। चारों ओर सिर्फ़ पानी ही पानी था। हालात ऐसे थे कि हज़ारों गाड़ियां सड़कों पर फंस गई थीं, और उन्हीं गाड़ियों में लोग भी फंसे हुए थे। उन्हीं लोगों में मशहूर अभिनेत्री आशा पारेख भी थीं। उनके साथ उनकी करीबी दोस्त और अभिनेत्री शम्मी आंटी भी थीं, और साथ में उनका ड्राइवर भी था।

एक इंटरव्यू में आशा पारेख जी ने बताया था कि उस दिन वह शम्मी आंटी को साथ लेकर साउथ मुंबई में किसी काम से गई थीं। उन्हें बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि घर लौटने में उन्हें अगले दिन तक का इंतज़ार करना पड़ेगा। जिस समय वे घर से निकली थीं, तब बारिश हो रही थी, लेकिन चूंकि मानसून का मौसम था, तो आशा जी को बारिश की कोई चिंता नहीं थी। उन्हें लगा यह तो हर साल की तरह की बारिश ही होगी।

आगे क्या होने वाला है, इससे अपरिचित दोनों मित्र, आशा पारेख जी और शम्मी जी ने वहां एक परिचित के घर लंच किया। उसके बाद दोपहर करीब तीन बजे वे लोग घर लौटने के लिए निकले। लेकिन तब तक हालात बिगड़ चुके थे। बारिश इतनी ज़्यादा हो चुकी थी कि मुंबई की सड़कों पर पानी ही पानी भर गया था और ट्रैफ़िक पूरी तरह से रुक गया था। नतीजा यह हुआ कि उनकी कार भी वहीं फंस गई। कई घंटों तक वे बिना खाना खाए और बिना सोए वहीं बैठे रहे। पानी भी उनके पास बहुत कम था।

आशा जी बताती हैं कि उनकी गाड़ी पूरी रात ट्रैफ़िक में फंसी रही। सड़क पर ज़रा भी हलचल नहीं थी। ऊपर से सड़कों पर कमर तक पानी भरा हुआ था, जिसकी वजह से वे गाड़ी से बाहर भी नहीं निकल सकते थे। माहिम क्रीक पर तो हालात और भी ख़राब थे—वहां तो पानी गले तक पहुंच चुका था। हालात इतने खराब थे कि समझ नहीं आ रहा था क्या किया जाए। आशा जी को शम्मी आंटी की हालत की चिंता ज़्यादा सता रही थी। उनकी उम्र भी ज़्यादा थी और तबियत भी ठीक नहीं थी। साथ ही ड्राइवर की फिक्र भी उन्हें थी। एक वक्त ऐसा आया जब आशा जी को लगा कि शायद अब यहां से जिंदा निकल पाना मुश्किल होगा।

परंतु अचानक उनको एक आशा की किरण दिखाई दी । उन्होंने देखा कि मुंबई के लोग अपने घरों से बाहर निकलकर दूसरों की सहायता कर रहे हैं। कई घंटे से फंसे लोगों को लोकल लोग चाय-पानी और बिस्कुट बांट रहे हैं । जिनकी हालत बिगड़ने लगी थी, उन्हें अपने घरों में ठहरने की जगह दे रहे हैं। आखिरकार मुंबई निवासियों के सहयोग और प्रशासन के प्रयासों से करीब 15 घंटे बाद ट्रैफ़िक फिर से सुचारू हो पाया और आशा पारेख जी भी सुरक्षित अपने घर पहुंच गईं।

आशा जी बताती हैं जिस समय वे गाड़ी में फंसी हुई थीं, उनके मन में कई बार एक प्रश्न आया कि मुंबई कब इतनी बदल गई? क्या यह वही मुंबई है, जहां उनका जन्म हुआ और जहां वे पली-बढ़ी थीं? लेकिन जब उन्होंने मुंबईवासियों की भावनाओं का सुन्दर रूप उन्होंने देखा, उनकी मदद करने का उनका प्रयास देखा, तो उनका मन भर आया। उन्हें अनुभव हुआ कि मुंबई आज भी वही है—एक ज़िंदादिल शहर।

आज उन्हीं एक वक्त की प्रसिद्ध अभिनेत्री आशा पारेख जी का जन्मदिवस है। वे आज 83 वर्ष की हो गई हैं। हम उनकी लंंबी आयु की कामना करते हैं।

(अर्चना शेरी)

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