Poetry by Manju Singh: जीवन की हार्दिक आकांक्षा और महत्वाकांक्षा में अंतर बस इतना है कि हार्दिक आकांक्षा हृदय की संतुष्टि प्रदान करती है जबकी महत्वाकांक्षा अहम की तुष्टि..
इंतजार है एक सपने के सच होने का
जिन्दगी हर दिन कुछ कहती है मैं ही नहीं समझ पाती
कुछ बड़ा कुछ बेहतर कुछ अच्छा कुछ हटकर हो सके मुझसे ये उम्मीद है उसकी
मैं अपने लिये न सही अपनी जिन्दगी की इस उम्मीद को नाउम्मीद न करूंगी और होगा कुछ बहुत शानदार
किसी के चेहरे पर मुस्कान खिलाउंगी किसी रोते हुए को हंसाउंगी मायूस दिलों में आशा की किरण जगाउंगी फिर उनकी दुआओं में जी जाउंगी
ज्यादा कुछ नहीं चाहिये मुझे बस मिले सुकून दिल का और चैन जिन्दगी का !!