Crime against women: क्या आप सोच सकती हैं कि आधी रात को आप भारत में किसी शहर में घर से निकलें या बस स्टॉप पर खड़ी हों तो लोग आप को क्या समझेंगे – आपके बारे में क्या सोचेगे..
रात के 12:30 बजे, हैदराबाद की सड़कों पर सन्नाटा था। बस-स्टॉप पर एक महिला खड़ी थी। साधारण कपड़े, कोई सुरक्षा नहीं। राहगीरों को लगा – यह कोई आम महिला है। लेकिन असलियत यह थी कि वह आईपीएस सुमथि, मलकाजगिरी की पहली महिला पुलिस आयुक्त थीं।
पहला घंटा
कुछ युवक लड़खड़ाते हुए आए। शराब की गंध हवा में फैली। उन्होंने बातचीत करने की कोशिश की। सुमथि चुपचाप खड़ी रहीं, हर पल को नोट करती हुई।
दूसरा घंटा
छात्रों का झुंड आया। कुछ मज़ाक किया, कुछ पास आने की कोशिश। माहौल असहज था।
तीसरा घंटा
कामकाजी लोग भी रुके। कुछ ने सवाल पूछे, कुछ ने अजीब निगाहों से देखा। तीन घंटे में लगभग 40 पुरुष उनसे बातचीत करने या पास आने की कोशिश कर चुके थे।
ऑपरेशन का अंत
सुबह होते ही पुलिस ने उन सभी की पहचान की। लेकिन केस दर्ज नहीं किए गए। उन्हें बुलाया गया काउंसलिंग के लिए, दी गई सख्त चेतावनी, और समझाया गया कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान कितना ज़रूरी है।
जनता की प्रतिक्रिया
खबर फैली तो महिलाओं ने राहत की सांस ली। उन्होंने कहा – “यह प्रयोग दिखाता है कि रात में अकेली महिला कितनी असुरक्षित महसूस करती है।”
सुमथि का इतिहास
यह पहली बार नहीं था। 25 साल पहले, जब वे डीएसपी थीं, उन्होंने काज़ीपेट रेलवे स्टेशन पर भी ऐसा ही प्रयोग किया था। उनका करियर हमेशा मैदान पर आधारित पुलिसिंग और साहसी पहल के लिए जाना जाता है।
यह ऑपरेशन सिर्फ एक प्रयोग नहीं था, बल्कि एक संदेश था – महिलाओं की सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
सुमथि ने दिखा दिया कि सड़क पर खड़ी एक महिला की सुरक्षा का सवाल आज भी उतना ही गंभीर है और इसे हल करने के लिए व्यवहारिक बदलाव और जागरूकता बेहद ज़रूरी है।
ये शहर हैदराबाद है और ये कुछ दिन पहले की ही बात है.
6 मई 2026 को मलकाजगिरी की पहली महिला पुलिस आयुक्त आईपीएस सुमथि ने आधी रात को ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे शहर को चौंका दिया।
यह कोई साधारण गश्त नहीं थी, बल्कि एक अंडरकवर ऑपरेशन था, जिसमें उन्होंने खुद को एक आम महिला की तरह पेश किया और अकेले बस स्टॉप पर खड़ी हो गईं ताकि पता चल सके कि रात में सड़क पर अकेली महिला के साथ क्या होता है।
(अर्चना शैरी)



