रात का सन्नाटा था, मोबाइल की स्क्रीन पर दो दिलों की धड़कनें शब्दों में बदल रही थीं। नयना और नवीन की बातचीत शायद साधारण चैट नहीं, बल्कि प्रेम का एक मधुर गीत थी।
नवीन ने लिखा – सॉरी यार..मैं रिप्लाई नहीं कर पाता अक्सर तुम्हारे मैसेजेस का..
नयना ने मुस्कुरा कर उत्तर दिया – अरे कोई बात नहीं..सॉरी मत कहो तुम..बस तुमको ऑनलाइन देखती हूं तो गुस्सा आता है कि मेरे मैसेज का जवाब देना तो दूर, तुम तो पढ़ते भी नहीं अक्सर
“हाँ, यार, ऑफिस के ग्रुप्स चलते हैं, इसलिए पूरे दिन ऑनलाइन रहना पड़ता है..और अक्सर तुम्हारे मैसेज नहीं देख पाता।”
नयना ने सहजता से कहा – “कोई बात नहीं..मैं समझ सकती हूं।”
नवीन ने वादा किया – “वादा है मेरा, अब दूँगा रिप्लाई हमेशा..
-ओके..देखती हूँ – हँस के बोली नयना
उसने दृढ़ता से कहा – “हाँ, पक्का।”
“थैंक्स” लिख दिया तब नयना ने..वो जानती थी कि ऐसा आगे भी हो सकता है..लेकिन प्यार तो कभी कम नहीं होगा तुम्हारा मेरे लिये – मन में कही ये बात उसने
नवीन ने अचानक अपनी भावनाओं के द्वार खोल दिये – “इससे पहले कि अभी तुम चली जाओ, एक बात कहना चाहता हूँ…
-हाँ, बोलो न..क्या बात है ? – थो़ड़े कौतुहल से पूछा नयना ने
-आई लव यू… बोल दिया.. बस, यही बोलना था !
नयना का दिल भी उसी लय में धड़क उठा – “ओह, आई लव यू टू, थैंक यू।”
नवीन ने भावुक होकर कहा – “तुमको भी धन्यवाद मेरे जीवन में आने के लिए, मुझे इतना सारा प्यार देने के लिए।
नयना ने भी उसी भाव से लिखा – “मेरे जीवन में आने के लिए तुम्हारा भी धन्यवाद, इतने साल बाद मुझसे बात करने के लिए। ज़रूर से।”
ईश्वर ने चाहा तो हम फिर मिलेंगे।”
हाँ, मिलेंगे न..जरूर मिलेंगे हम
नवीन ने दिल की गहराई से वादा माँगा – “प्लीज तुम भूलना नहीं अपना वादा, अगले जन्म में मुझसे शादी करना, मुझे तुम जैसी पत्नी चाहिए।”
नयना ने मुस्कुराकर लिखा – “ठीक है कर लूँगी – तुमको मुझ जैसी पत्नी चाहिए न, थैंक्स, लेकिन ये बताओ, तुमको कैसे पता कि मैं अच्छी पत्नी हूँ।”
नवीन ने उत्तर दिया – “मुझे कुछ नहीं पता है, मेरे दिल को पता है, बस इतना ही काफी है मेरे लिए।”
नयना ने वादा निभाने का आश्वासन दिया, तब भी नवीन ने आतुरता से लिखा –
– “प्लीज, भूलना नहीं अपना वादा,
– हां बाबा, पक्का प्रॉमिस !
हां वाला जवाब पाते ही नवीन की उंगलियों ने लिखा – “तुम मेरी एक बहुत प्यारी खुशी हो।”
-अच्छा जी..तब तो मेरा बड़ा सा थैंक यू तुम्हारे लिये
रोज होती हैं बातें..होते होते एक दिन बातें कविताओं तक पहुँचीं, फेसबुक की यादें भी कीं, दोस्तों का ज़िक्र भी हुआ, प्यार भरी तकरार भी और हर शब्द में मुस्कुराता प्रेम और मनुहार भी।
– ‘कितनी प्यारी हो तुम !’
– ‘तुमको ऐसा लगता है तब तो सही ही होगा’ – मुस्कुरा कर बोली नयना
-अरे सुनो, तुम्हारी कविता मैंने पढ़ी थी फेसबुक पर -किसी के पेज पर देखी थी मैंने
-ओह अच्छा..हां यार कभी कभी फेसबुक पर भी डाल देता हूं कविता अपनी
-अरे, सुनो तो सही..वहां नीचे कमेंट में सबने बहुत तारीफ़ की है तुम्हारी उस कविता की”
फिर आज बातचीत के दौरान आया जन्मदिन का प्रसंग – नवीन ने थोड़ा डरते डरते पूछा
-यार बता दो प्लीज एक बार फिर से तुम्हारे बर्थडे की तारीख..
-नहीं बताउंगी अब..पिछले तीन साल में पच्चीस बार बता चुकी हूं
-अरे सॉरी यार..दिमाग से निकल गया ..क्या करूं काम की बातें दिमाग में रुकती ही नहीं आजकल
नैना ने बात लंबी नहीं खींची और बता दिया – 29 अक्टूबर..सुन लो तुम ये आखिरी बार है..अब ना बताउंगी कभी !
नवीन ने राहत की सांस ली – “ओह ओके ओके अब नहीं भूलूंगा कभी अपनी प्रियतमा का जन्मदिवस.”
-देखती हूं..
नवीन ने इमानदारी से वादा किया -पक्का, अब कभी नहीं भूलूंगा।
तभी जैसे कुछ याद आया नयना को, उसने झट से लिखा –
-सुनो, अब सो जाओ..मुझे जाना है..कल मिलती हूं
नवीन ने मुस्कुराते हुए लिखा – “गुड नाइट माय स्वीटहार्ट, आई लव यू, ऑलवेज।”
नैना ने दिल से जवाब दिया – “गुड नाइट जान, आई लव यू टू”
दूर एक दूसरे से अपनी जिन्दगी जीते दो लोगों के मध्य यह संवाद शनैः शनैः अब कविता जैसा सुन्दर हो गया था शायद.. जहाँ हर शब्द एक धड़कन और हर वादा एक गीत।
नैना और नवीन की यह प्रेम कहानी उनके जीवन के साथ चल रही है – उसमें “आई लव यू” सिर्फ़ शब्द नहीं, बल्कि भावनाओं का दर्पण बन गया है..और उस दर्पण में सेम टु यू जैसे आत्माओं का मिलन..
(सुमन पारिजात)



