प्यार एक कविता है
तुमसे मिलकर
मौसम अच्छा हो जायेगा
तुमसे मिल कर
जीना मुझको आ जायेगा
तुमसे मिल कर
प्यार का मौसम छा जायेगा
प्रेम जीना सिखाता है
प्रेम जीवन में ही
स्वर्ग दिखाता है
तुम जीवित हो
प्रेम तुम्हें बताता है
प्रेम गाता है
प्रेम मुस्कुराता है
प्रेम अंधेरे में
सूरज बन जाता है
प्रेम पूजा है
तपस्या है आराधना है
प्रेम अदृश्य की
दृश्य साधना है
प्रेम भाव है
प्रेम स्वर है
प्रेम देवता है
प्रेम ईश्वर है
अच्छा लगा आज
तुमसे मिल कर
प्रेम पर कलम चलाना
प्रेम के रंग को
कल्पनाओं में बिखराना
अवर्णनीय है प्रेम
प्रेम के धरातल पर
शब्द मूक हो जाते हैं
गूंगे के गुड़ जैसे
मुस्कान में मुस्कुराते हैं
प्रेम सार्वभौमिक है
और सर्वशक्तिमान भी
प्रेम धरती है
और आसमान भी
प्रेम तुम हो
प्रेम मैं हूँ
प्रेम हम हैं
प्रेम जीवन है
प्रेम गंतव्य है
और प्रेम ही पथ है
प्रेम गति है
और प्रेम ही रथ है
प्रेम से आये हैं हम
और प्रेम में ही
समा जायेंगे
प्रेम के अंतरिक्ष में
नव तारक से टिमटिमायेंगे
हम प्यार कहलायेंगे
हम प्यार ही बन जायेंगे !!
(सुमन पारिजात)



