Jail Break: अभी आप जो पढ़ने वाले है वो फ़िल्म नहीं हकीकत है..किसकी मजाल थी कि पेरिस की उस खतरनाक जेल से भाग सके..लेकिन..
साल 1986 में पेरिस ने एक ऐसी घटना देखी, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। यह कोई आम जेल ब्रेक नहीं थी, न ही सिर्फ अपराध की कहानी। यह प्यार, धैर्य, महीनों की तैयारी और एक महिला के अटूट संकल्प की दास्तान थी, जिसने फ्रांस की सबसे सुरक्षित जेल व्यवस्था को कुछ ही मिनटों में चुनौती दे दी।
इस कहानी के केंद्र में थे मिशेल वाउजूर और उसकी पत्नी नादिन वाउजूर। मिशेल उस समय पेरिस के दिल में स्थित ला सांते जेल में बंद था, जिसे फ्रांस की सबसे सख्त और सुरक्षित जेलों में गिना जाता है। उस पर हथियारबंद डकैती और एक पुलिस अधिकारी पर जानलेवा हमले का आरोप था। उसे 18 साल की सजा मिली थी। ऊंची दीवारें, कड़ी निगरानी और सख्त नियमों के कारण यहां से भागना नामुमकिन माना जाता था। यह उसकी जिंदगी की चौथी सफल जेल ब्रेक थी, और कुल मिलाकर वह अपने जीवन में पांच बार जेल से भाग चुका था।
जब सभी रास्ते बंद लगने लगे, तब उसकी पत्नी नादिन ने वो फैसला लिया जो कोई साधारण इंसान नहीं ले सकता। उसने न किसी गैंग की मदद ली, न गार्ड्स को रिश्वत दी और न ही किस्मत पर भरोसा किया। उसने हेलीकॉप्टर उड़ाना सीखने का फैसला किया। नादिन ने फर्जी नाम से फ्लाइंग स्कूल में दाखिला लिया और महीनों तक ट्रेनिंग की। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक यह तैयारी लगभग दो साल तक चली। उसने प्राइवेट पायलट लाइसेंस हासिल किया। यह न शौक था, न सपना, बल्कि सिर्फ एक मकसद था, अपने पति को जेल से निकालना।
जेल के अंदर मिशेल ने अपने साथी कैदी पियरे हर्नांडेज के साथ मिलकर पूरा प्लान तैयार किया। पहले योजना थी कि हेलीकॉप्टर जेल की छत पर उतरेगा, लेकिन जगह न मिलने पर रणनीति बदली गई। अब तय हुआ कि हेलीकॉप्टर हवा में होवर करेगा और मिशेल स्किड पकड़कर उसमें चढ़ेगा। गार्ड्स को डराने के लिए मिशेल ने नेक्टरिन फलों को हरे रंग से पेंट किया और उन्हें ग्रेनेड जैसा दिखाया, ताकि कोई गोली न चले और अफरातफरी का फायदा उठाया जा सके।
26 मई 1986 की सुबह करीब 10 बजकर 30 मिनट पर नादिन ने एक Alouette II हेलीकॉप्टर किराए पर लिया। इसका किराया लगभग 2200 फ्रैंक प्रति घंटा था, जो उसने नकद चुकाया। वह सीधे हेलीकॉप्टर लेकर ला सांते जेल के ऊपर पहुंची और रेडियो चेतावनियों को अनदेखा करते हुए जेल की छत के ऊपर होवर करने लगी। नीचे मौजूद गार्ड्स ऊपर देखने लगे। कुछ ही पलों में रस्सी और नकली हथियार नीचे डाले गए। मिशेल ने स्किड पकड़ा और हेलीकॉप्टर में चढ़ गया। उसका साथी पियरे आखिरी पल में डर गया और उसने सरेंडर कर दिया।
न कोई गोली चली, न कोई अलार्म समय पर बज पाया और न ही किसी को प्रतिक्रिया देने का मौका मिला। कुछ ही मिनटों में हेलीकॉप्टर पेरिस के ऊपर से उड़ता हुआ दक्षिण की ओर बढ़ गया और सिटी यूनिवर्सिटी के एक एथलेटिक मैदान में उतर गया। वहां पहले से एक गेटअवे कार तैयार खड़ी थी। दोनों उसमें बैठे और शहर की भीड़ में गायब हो गए। पूरी घटना महज चार से पांच मिनट में खत्म हो चुकी थी।
मिशेल और नादिन करीब चार महीने तक फरार रहे। बाद में एक डकैती के दौरान मिशेल के सिर में गोली लगी। वह कोमा में चला गया और उसका शरीर आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हो गया, लेकिन बाद में उसने योगा की मदद से रिकवरी की। नादिन को गिरफ्तार कर सजा दी गई। मिशेल ने कुल 27 साल जेल में बिताए, जिनमें से 17 साल उसने एकांत कारावास में गुजारे। साल 2003 में रिकॉर्ड 16 साल की सजा छूट के बाद उसे रिहा किया गया।
यह घटना इतनी मशहूर हुई कि इस पर 1992 में फिल्म La Fille de l’air बनी और इसके बाद फ्रांस की कई जेलों में हेलीकॉप्टर एस्केप रोकने के लिए ऊपर जाल और केबल्स लगाए गए। यह कहानी सिर्फ एक्शन या अपराध की नहीं थी, बल्कि यह दिखाती है कि जब प्यार, योजना और हिम्मत एक साथ आ जाएं, तो सबसे ऊंची दीवारें भी छोटी पड़ जाती हैं



