Poetry by Shalu Arora: एक अरसे के बाद मुकम्मल हुई है एक गजल – शालू ने कहा -आपको भी अच्छी लगेगी..पढ़िये जरा..
किताबों में वो पुराना गुलाब रहने दो,
हमें न चाहिए कोई जबाब रहने दो !
चमक रहा है अभी आफ़ताब रहने दो,
ज़रा रुको अभी रुख पे नकाब रहने दो !
तू देखना किसी दिन तुझको याद आऊंगा,
अभी अधूरे हमारे है ख़्वाब रहने दो !
अभी तो दूर मुहब्बत से मुझको रहना है,
बहुत है काम अभी उनका दाब रहने दो !
भटकना है मुझे तो उम्र भर मुहब्बत में,
मेरे लिए न समंदर, सराब रहने दो !
करू मैं काम जो ईमानदारी से सारे,
डरू मैं क्यूं ये अजाब-ओ-सबाब रहने दो !
मैं जिंदगी में अकेला हूँ कोई साथ नहीं,
न होगी हमसे गुलामी ज़नाब रहने दो !
गज़ल नहीं ये मेरे दिल के छाले है सारे,
मुझे न चाहिए कोई कोई ख़िताब रहने दो !
(शालू अरोरा)