Kids’ Screen Time कम किया जा सका है..जी हां, बच्चों को स्क्रीन से दूर रखने के 2 असरदार तरीके सुझाये हैं दि अमेजिंग जेनेरेशन की लेखिका ने..
हाल ही में प्रकाशित किताब “The Amazing Generation” में हेल्थ और साइंस जर्नलिस्ट कैथरीन प्राइस ने बच्चों और टीनएजर्स से सीधे संवाद किया है। इस किताब में वह स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल के खतरों के बारे में चेतावनी देती हैं।
यह किताब उन्होंने सोशल साइकोलॉजिस्ट और “The Anxious Generation” के लेखक जोनाथन हाइट के साथ मिलकर लिखी है। किताब कई हिस्सों में बंटी हुई है, जिसमें कॉमिक स्ट्रिप्स और Gen Z युवाओं की कहानियाँ शामिल हैं जो अपने स्क्रीन टाइम को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
प्राइस का उद्देश्य है कि बच्चों और बड़ों को “अर्थपूर्ण, संतोषजनक और मजेदार जीवन जीने” में मदद मिले। उनका मानना है कि इसका सबसे अच्छा तरीका है कि लोग असली दुनिया में स्क्रीन-फ्री गतिविधियों में हिस्सा लें।
The Anxious Generation Movement माता-पिता को प्रोत्साहित करता है कि वे बच्चों को टैबलेट और स्मार्टफोन से ध्यान हटाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ। इसके लिए प्राइस ने दो आसान तरीके बताए हैं।
बच्चों को जिम्मेदारियाँ सौंपें
प्राइस कहती हैं कि सबसे पहले माता-पिता को ऐसा काम सोचने चाहिए जो बच्चा खुद कर सके। यह काम ऐसा होना चाहिए जो उसने पहले कभी न किया हो और थोड़ा चुनौतीपूर्ण भी लगे।
-जैसे कि अकेले कोई छोटा काम निपटाना,
-स्कूल या दोस्त के घर तक पैदल या साइकिल से जाना,
-अपना नाश्ता या लंच खुद बनाना।
इन जिम्मेदारियों से बच्चे न सिर्फ स्क्रीन से दूर रहते हैं बल्कि कई अन्य फायदे भी मिलते हैं। प्राइस के अनुसार, “ऐसी गतिविधियाँ बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाती हैं, उन्हें मज़ा आता है और वे एक नई स्किल सीखते हैं जो आगे काम आएगी।”
रिसर्च भी बताती है कि इस तरह की जिम्मेदारियाँ बच्चों और माता-पिता दोनों की चिंता (anxiety) को कम करती हैं।
असली दुनिया के शौक विकसित करने में मदद करें
प्राइस सलाह देती हैं कि माता-पिता बच्चों से बातचीत करें और जानें कि उन्हें कौन-सी नॉन-स्क्रीन गतिविधियाँ पसंद हैं। फिर ऐसे हालात बनाएँ जिससे वे गतिविधियाँ संभव हो सकें।
-छोटे बच्चों के लिए यह उतना आसान हो सकता है जितना कि एक कार्डबोर्ड बॉक्स और आर्ट सप्लाई देना और उनकी क्रिएटिविटी को खुला छोड़ देना।
-बड़े बच्चों के लिए यह थोड़ा अलग हो सकता है।
उदाहरण के तौर पर, प्राइस की एक सहयोगी ने अपने तीन किशोर बेटों के लिए गैरेज को मजेदार जगह बना दिया। उन्होंने Craigslist से फ्री वेट्स लिए और गैरेज में स्नैक्स रख दिए। अब हर दोपहर वहाँ लड़के इकट्ठा होकर वेट्स उठाते हैं।
अगर घर में जगह न हो, तो माता-पिता बच्चों को किसी कम्युनिटी सेंटर, मॉल या कैफ़े जैसी जगह पर समय बिताने का विकल्प दे सकते हैं।
प्राइस कहती हैं कि युवाओं में स्वाभाविक रूप से यह इच्छा होती है कि वे अपने दोस्तों के साथ निजी समय बिताएँ। अगर माता-पिता उन्हें स्क्रीन-फ्री विकल्प देंगे, तो उन्हें स्मार्टफोन या टैबलेट पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा।
इस तरह, जिम्मेदारियाँ देने और असली दुनिया के शौक विकसित करने से माता-पिता बच्चों को स्क्रीन से दूर रख सकते हैं और उन्हें एक अर्थपूर्ण, मजेदार और आत्मविश्वासी जीवन जीने में मदद कर सकते हैं।
(प्रस्तुति -अर्चना शैरी)



