Success Story of Mona Dangi: रिज़ल्ट देख कर मोना ने माँ को फोन किया – “हैलो मां… अब आप डिप्टी कलेक्टर की मां हैं” -अशोकनगर की मोना डांगी की प्रेरक सफलता गाथा, जिसने सपनों को दिया शानदार मुकाम..
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के एक साधारण से घर में 8 नवंबर 2025 की शाम अचानक खुशियों की लहर दौड़ गई। जैसे ही MPPSC-2023 के नतीजे घोषित हुए, घर की बेटी ने फोन उठाया और भावनाओं से भरी आवाज़ में अपनी मां से कहा –
“हैलो… हां मां… अब आप डिप्टी कलेक्टर की मां हैं।”
यह आवाज़ थी मोना डांगी की, जिन्होंने अपने तीसरे प्रयास में MPPSC में 12वीं रैंक हासिल कर डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना साकार किया। यह पल इतना सच्चा और भावुक था कि उनकी बहन ने अनजाने में इस बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया। कुछ ही समय में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लाखों लोगों की आंखें नम हो गईं। यह सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं थी, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और परिवार के सपनों की जीत का प्रतीक बन गई।
जब शब्दों से आगे निकल गया एक पल
मीडिया से बातचीत में मोना ने बताया कि रिजल्ट शाम को आया था। उन्होंने घर फोन किया, बहन पास ही थी। बात करते-करते बहन ने वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। मोना बताती हैं कि आमतौर पर वह दोस्तों से हिंदी में बात करती हैं, लेकिन उस दिन उन्होंने मां से बुंदेलखंडी बोली में बात की।
उन्होंने कहा -“जैसे ही मैंने मां से कहा कि अब आप डिप्टी कलेक्टर की मां हैं, मेरी आंखों में आंसू आ गए।”
उस एक पल में सालों की मेहनत, सुबह-सुबह लाइब्रेरी तक की यात्राएं, आर्थिक तंगी, और अनगिनत सपने सिमट आए।
अशोकनगर से निकले सपने
मोना डांगी मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के एक किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की और कक्षा 9 से 12 तक की शिक्षा शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से पूरी की।
मोना बताती हैं कि 12वीं के बाद उनके इलाके में न तो कोचिंग की सुविधा थी और न ही रोजगार के पर्याप्त अवसर। बेहतर भविष्य की तलाश में वह अपने परिवार के साथ इंदौर चली गईं, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें।
उनके गांव में पहले किसी लड़की ने इस स्तर की पढ़ाई या प्रशासनिक सेवा की तैयारी नहीं की थी। यही वजह थी कि उनका संघर्ष सिर्फ निजी नहीं, बल्कि सामाजिक भी था।
MPPSC की यात्रा: पहले प्रयास से मंज़िल तक
मोना ने 2022 में MPPSC का पहला प्रयास दिया और उसमें कमर्शियल टैक्स इंस्पेक्टर के पद पर चयनित हुईं। लेकिन उनका लक्ष्य स्पष्ट था – डिप्टी कलेक्टर बनना।
परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने तय किया कि वह दो प्रयासों में ही अपना लक्ष्य हासिल करेंगी। आखिरकार MPPSC-2023 में उन्होंने 12वीं रैंक हासिल कर यह सपना पूरा कर लिया।
मोना कहती हैं -“अंत भला तो सब भला।”
तैयारी की रणनीति: सीमित साधनों में स्मार्ट प्लानिंग
मोना की तैयारी पूरी तरह अनुशासन और संसाधनों के सही उपयोग पर आधारित रही –
कोचिंग की शुरुआत: इंदौर में महंगी कोचिंग वहन नहीं कर पाईं, लेकिन सीनियर्स के मार्गदर्शन से उन्हें A-Disha Project जैसे NGO का सहारा मिला, जहां मुफ्त तैयारी करवाई जाती है।
लॉकडाउन में पढ़ाई: YouTube, Google और ऑनलाइन नोट्स के जरिए सेल्फ स्टडी की।
लाइब्रेरी रूटीन: वह रोज़ाना 10–15 किलोमीटर का सफर तय कर सुझलाम सुफलाम ट्रस्ट लाइब्रेरी जाती थीं और डेढ़ साल तक नियमित पढ़ाई की।
प्रीलिम्स रणनीति: कंटेंट आधारित पढ़ाई, MCQ वीडियो, और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का गहन अभ्यास।
मेन्स रणनीति: हर हफ्ते टेस्ट सीरीज़, एक यूनिट प्रति सप्ताह, और रविवार को पेपर-वाइज रिवीजन।
मोना का मानना है कि जब कोई ठान ले कि दो साल में लक्ष्य हासिल करना है, तो मेहनत अपने आप उसी दिशा में ढल जाती है।
इंटरव्यू अनुभव
मोना के अनुसार इंटरव्यू सरल लेकिन गहराई वाला था। सवाल उनके बैकग्राउंड, हॉबीज़ और राजनीति विज्ञान (MA विषय) से जुड़े थे। उन्होंने रटने की बजाय व्यावहारिक समझ पर ध्यान दिया।
उनका कहना है -“सवाल बहुत बेसिक थे। मैंने शांत रहकर व्यावहारिक सोच के साथ जवाब दिए।”
सबसे बड़ी चुनौती: खुद पर विश्वास
मोना बताती हैं कि उनके लिए सबसे मुश्किल लड़ाई मानसिक थी। सीमित संसाधनों वाले माहौल से आने के कारण कई बार आत्मविश्वास डगमगा जाता था।
“खुद को यह यकीन दिलाना कि यह हो सकता है, वही सबसे बड़ी चुनौती थी,” वह कहती हैं।
अन्य उपलब्धियां
MPPSC के साथ-साथ मोना ने MPSET और UGC NET (राजनीति विज्ञान) भी पास किया। MA की पढ़ाई के दौरान कई लक्ष्य एक साथ साधे, जो उनकी कड़ी मेहनत और क्षमता को दर्शाता है।
युवाओं के लिए संदेश
मोना डांगी का संदेश बेहद सीधा लेकिन गहरा है –
“खुद पर भरोसा रखिए। सिलेबस पहले से तय है, बस उसे ईमानदारी से पढ़ना है। अगर आपके पास चयन का स्पष्ट कारण है, तो वही आपकी सबसे बड़ी ताकत बनेगा।”
अशोकनगर से डिप्टी कलेक्टर तक
मोना डांगी की कहानी सिर्फ MPPSC पास करने की नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे, संघर्ष और पारिवारिक समर्थन की कहानी है, जो किसी भी साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर असाधारण मुकाम तक पहुंचा सकती है।
“हां मां… अब मैं डिप्टी कलेक्टर हूं” -यह एक वाक्य नहीं, बल्कि वर्षों की तपस्या, त्याग और सपनों की जीत है।



