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Wednesday, January 14, 2026

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Story Of A Sex Worker: ‘मुझे लगा था कि मैं वहां से ज़िंदा नहीं निकल पाऊंगी’

Story Of A Sex Worker: एक हादसे के बारे में बताते हुए रो पड़ी एक सेक्स वर्कर.. पढ़िये सेक्स वर्कर्स पर हिंसा, चुप्पी और सुरक्षा की जंग की अंदरूनी कहानी..

ऐतिहासिक रूप से यौन कर्मियों के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों की रिपोर्टिंग बेहद सीमित रही है। डर, सामाजिक बदनामी और क़ानूनी उलझनों के कारण अधिकतर मामले सामने ही नहीं आ पाते। लेकिन अब सेक्स वर्कर्स, अकादमिक शोधकर्ता और सामाजिक संगठनों का एक साझा प्रयास इस ख़ामोशी को तोड़ने की कोशिश कर रहा है।

जब अलाना हमारे साथ बातचीत के लिए पहुंचीं, तो उनके हाथ में एक बैग था। उस बैग में लेस वाली अंतर्वस्त्र, घुटनों तक आने वाले बूट और चमड़े का एक चाबुक रखा था—उनके पेशे से जुड़ी चीज़ें, जो उनकी रोज़मर्रा की पहचान का हिस्सा हैं।

शुरुआत में अलाना कुछ असहज और डरी हुई नज़र आईं, लेकिन जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ी और चर्चा उनके काम के अनुभवों पर केंद्रित हुई, उनका आत्मविश्वास लौटने लगा।

अलाना उनका असली नाम नहीं है। उन्होंने यह नाम खुद चुना है ताकि उनकी पेशेवर पहचान और निजी जीवन के बीच एक स्पष्ट दूरी बनी रहे। निजी जीवन में अलाना एक मां हैं और एक सामान्य घरेलू ज़िंदगी भी जीती हैं।

वह कहती हैं, “काम ख़त्म होते ही हम मेकअप उतार देते हैं और फिर बच्चों को स्कूल छोड़ने या रोज़मर्रा की ख़रीदारी करने निकल पड़ते हैं।”

डर्बीशायर, यूनाइटेड किंगडम की रहने वाली अलाना पहले ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) और मनोरंजन उद्योग में भी काम कर चुकी हैं। आज सेक्स वर्क ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है।

अलाना इस सच्चाई से इनकार नहीं करतीं कि यह पेशा कई बार उन्हें और दूसरी महिलाओं को असुरक्षा की भावना से भर देता है—ख़ासतौर पर उन सेक्स वर्कर्स को, जिनके पास विकल्प सीमित होते हैं।

वह मानती हैं कि उनका भाग्य अपेक्षाकृत बेहतर रहा है, क्योंकि पिछले तीन वर्षों में उन पर केवल एक बार गंभीर हमला हुआ। उस घटना में एक ग्राहक ने उनकी अनुमति के बिना उनके शरीर में नशीला पदार्थ डालने की कोशिश की थी।

हमले वाले दिन की भयावह घटना

जिस बुकिंग पर अलाना गई थीं, वह उनके घर के रास्ते में ही थी, इसलिए शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगा। फिर भी, उनके मन में एक अनजाना डर था कि कुछ ठीक नहीं है।

अलाना बताती हैं कि ग्राहक देखने में एक सामान्य अधेड़ उम्र का व्यक्ति था, लेकिन वह उनके पहुंचने से पहले ही नशे का सेवन कर चुका था।

वह कहती हैं, “वह धीरे-धीरे ज़्यादा हिंसक और आक्रामक होता जा रहा था। उसने ज़बरदस्ती मेरा सिर पकड़कर अपनी ओर खींच लिया।”

अलाना के मुताबिक, वह व्यक्ति यौन संबंध बनाने को लेकर बेहद आक्रामक हो चुका था। इसके बावजूद अलाना पूरे एक घंटे की बुकिंग अवधि तक वहीं रहीं, सिर्फ इसलिए कि कहीं वह और भड़क न जाए।

वह कहती हैं, “वह ऐसी जगह थी, जहां से सुरक्षित निकलने का कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा था।”

हमले के बाद अलाना को चिकित्सकीय इलाज की ज़रूरत पड़ी, लेकिन अन्य कई सेक्स वर्कर्स की तरह उन्होंने भी पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई।

उनका कहना है, “मुझे भरोसा नहीं था कि शिकायत करने से कुछ बदलेगा।”

अलाना मानती हैं कि सेक्स वर्क से जुड़ी सामाजिक बदनामी इतनी गहरी है कि लोग अक्सर पीड़िता को ही दोषी ठहराने लगते हैं—यह मानकर कि उसने खुद ही खुद को खतरे में डाला।

इस घटना का मानसिक असर लंबे समय तक अलाना पर रहा। वह कहती हैं, “मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मुझसे कुछ बहुत कीमती छीन लिया गया हो।”

यह कहानी सिर्फ अलाना की नहीं है, बल्कि अनगिनत सेक्स वर्कर्स की साझा हकीकत है।

खतरे से भरी ज़िंदगी

शोध बताते हैं कि आम नागरिकों की तुलना में सेक्स वर्कर्स के ख़िलाफ़ अपराध होने की संभावना कहीं अधिक होती है, खासकर हिंसक अपराधों की।

2016 में सेक्स वर्कर्स के बीच किए गए एक ऑनलाइन सर्वे में 47 प्रतिशत प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि वे किसी न किसी प्रकार के अपराध का शिकार हो चुके हैं। इनमें उत्पीड़न, बलात्कार, शारीरिक हमले, लूटपाट और अपहरण की कोशिशें शामिल थीं।

1999 में प्रकाशित ‘रिस्की बिज़नेस: हेल्थ एंड सेफ्टी इन सेक्स इंडस्ट्री’ नामक अध्ययन में नौ वर्षों के दौरान 402 सेक्स वर्कर्स पर शोध किया गया। इसमें सामने आया कि समान उम्र की अन्य महिलाओं की तुलना में सेक्स वर्कर्स की मृत्यु दर 12 गुना अधिक थी।

अलाना कहती हैं, “हमारे पेशे को समाज में कलंक की तरह देखा जाता है और यही सोच हमें हिंसा के लिए आसान निशाना बना देती है।”

लेकिन अब अलाना सिर्फ पीड़िता बनकर नहीं रहना चाहतीं। वह हालात बदलने की कोशिश में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

वह उन चुनिंदा सेक्स वर्कर्स में शामिल हैं, जिन्हें सुरक्षा से जुड़े एक शोध प्रोजेक्ट के लिए सलाहकार पैनल में चुना गया है।

नई रिपोर्टिंग व्यवस्था की पहल

नॉटिंघम विश्वविद्यालय एक ऐसे रिपोर्टिंग सिस्टम को विकसित कर रहा है, जिससे सेक्स वर्कर्स यौन उत्पीड़न या हिंसा की घटनाओं की जानकारी सुरक्षित तरीके से दे सकें।

यह प्रणाली अपने अंतिम चरण में है और उम्मीद की जा रही है कि साल के अंत तक पुलिस और अन्य एजेंसियां इसका इस्तेमाल शुरू कर देंगी।

इस शोध का नेतृत्व अपराध विज्ञान की सहायक प्रोफेसर डॉ. लैरिसा सैंडी कर रही हैं। ऑस्ट्रेलिया में जन्मी लैरिसा पहले भी सेक्स वर्क को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की वकालत कर चुकी हैं।

जर्मनी और न्यूज़ीलैंड जैसे देशों ने सेक्स वर्क से जुड़े क़ानूनों में उदारता दिखाई है, हालांकि इसके चलते उन देशों पर सेक्स टूरिज़्म और मानव तस्करी बढ़ने के आरोप भी लगे हैं।

डॉ. सैंडी का कहना है, “जब क़ानून लागू करने की ज़िम्मेदारी पुलिस पर होती है, तब सेक्स वर्क को अपराध की श्रेणी से बाहर करने से पीड़ितों को बिना डर शिकायत करने का अवसर मिलता है और उनकी सुरक्षा बेहतर हो सकती है।”

उनका मानना है कि अस्पष्ट और भ्रमित करने वाले क़ानून भी अपराधों की रिपोर्टिंग कम होने का बड़ा कारण हैं।

मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अनुसार, उत्तरी आयरलैंड को छोड़कर यूके में पैसे के बदले सेक्स सेवाएं देना क़ानूनी है। हालांकि, उत्तरी आयरलैंड में इसके लिए भुगतान करना ग़ैरक़ानूनी है।

इसके बावजूद ब्रिटेन में कई यौन-संबंधी गतिविधियां अवैध हैं, जैसे यौन सेवाओं का प्रचार-प्रसार करना या कोठा चलाना।

क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) का कहना है कि उनका उद्देश्य सेक्स वर्कर्स को सज़ा देना नहीं, बल्कि उनका शोषण करने वालों को क़ानून के कटघरे में लाना है।

CPS के मुताबिक, अपराधी अक्सर जानबूझकर सेक्स वर्कर्स को निशाना बनाते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे शिकायत नहीं करेंगी और अगर करेंगी भी तो उन्हें समर्थन नहीं मिलेगा।

अलाना कहती हैं कि यह सोच सेक्स वर्कर्स को और अधिक अपमानित महसूस कराती है।

वह सवाल उठाती हैं, “जब ज़्यादातर लोग सेक्स करते हैं, तो पैसे लेकर सेक्स करने वालों को अलग नज़र से क्यों देखा जाता है?”

‘हमारे लिए यह भी एक नौकरी है’

नॉटिंघम की प्रॉस्टिट्यूशन आउटरीच सर्विस (PAWS) चलाने वाली जेसिका ब्रेनन कहती हैं, “सेक्स वर्क ग़ैरक़ानूनी नहीं है, लेकिन समाज इसे अक्सर अनैतिक मानता है।”

उनके मुताबिक, इसी सोच के कारण सेक्स वर्कर्स अपने साथ हुई हिंसा की शिकायत करने से डरते हैं। उन्हें आशंका रहती है कि उन्हें ही दोषी ठहराया जाएगा या उनकी बात पर भरोसा नहीं किया जाएगा।

1990 से यह संस्था सड़क पर काम करने वाली महिलाओं और अन्य सेक्स वर्कर्स के साथ काम कर रही है, लेकिन अपराधियों को सज़ा दिलवाने में कई बार क़ानूनी अड़चनें सामने आती हैं।

जेसिका कहती हैं, “शायद ही कोई हफ्ता ऐसा गुजरता हो, जब जिन लोगों की हम मदद कर रहे हैं, उन पर हमला न हुआ हो। लेकिन शायद ही कोई मामला अदालत तक पहुंच पाता है।”

उनका कहना है, “हम सेक्स वर्क को भी एक मेहनत वाला सामान्य काम मानते हैं। हम चाहते हैं कि लोग अपने अनुभवों के बारे में खुलकर और ईमानदारी से बात कर सकें।”

अलाना भी इसी सोच से सहमत हैं। वह चाहती हैं कि समाज उन्हें एक सम्मानित कामगार के रूप में देखे।

वह कहती हैं, “मैं टैक्स देती हूं, नेशनल इंश्योरेंस का भुगतान करती हूं।”

अंत में वह कहती हैं, “सेक्स वर्कर्स कोई त्यागे हुए लोग नहीं हैं। अगर उनके साथ भी अन्य कामगारों जैसा व्यवहार किया जाए, तो यही सबसे बेहतर और इंसानी रास्ता होगा।”

(प्रस्तुति -सुमन पारिजात)

 

 

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