Saalumarda Thimmakka: जानिए ‘वृक्ष माता’ सालूमरदा थीमक्का की प्रेरक कहानी — जिन्होंने राष्ट्रपति भवन का प्रोटोकॉल तोड़कर राष्ट्रपति कोविंद को दिया आशीर्वाद..
कर्नाटक की रहने वालीं सालूमरदा थीमक्का एक प्रसिद्ध पर्यावरणविद और समाजसेविका हैं। उन्होंने अपने जीवन में बरगद के 400 पेड़ों समेत 8000 से भी अधिक पेड़ लगाए हैं। पेड़ों के प्रति उनके इस अद्भुत समर्पण के कारण उन्हें सम्मानपूर्वक ‘वृक्ष माता’ कहा जाता है।
राष्ट्रपति भवन में भावनाओं से भरा क्षण
पद्म पुरस्कार समारोह के दौरान जब 107 वर्षीया थीमक्का पुरस्कार लेने के लिए मंच पर पहुँचीं, तो वहां उपस्थित सभी लोगों की निगाहें उन पर टिक गईं। हल्के हरे रंग की साड़ी, माथे पर त्रिपुंड और चेहरे पर सौम्य मुस्कान लिए थीमक्का के व्यक्तित्व में एक अलग ही शांति थी।
जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया और कैमरे की ओर मुड़ने का अनुरोध किया, तो थीमक्का ने सहज भाव से राष्ट्रपति के माथे पर हाथ रखकर उन्हें आशीर्वाद दे दिया। यह दृश्य इतना आत्मीय था कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूरे समारोह कक्ष में बैठे अतिथियों के चेहरे पर मुस्कान खिल उठी। पूरा हॉल तालियों की गूंज से भर गया।
राष्ट्रपति भवन के सख्त प्रोटोकॉल के बावजूद थीमक्का का यह स्नेहभरा gesture हर किसी के दिल को छू गया।
‘वृक्ष माता’ बनने की प्रेरक यात्रा
सालूमरदा थीमक्का का जीवन धैर्य और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। कभी वह एक साधारण जीवन जी रही थीं। शादी के कई साल बाद भी जब उन्हें संतान नहीं हुई, तो वे बहुत दुखी हुईं। एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने जीवन समाप्त करने का विचार किया। लेकिन उनके पति ने उन्हें संभाला और पौधारोपण की दिशा में प्रेरित किया।
इसके बाद उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य पेड़ लगाना बना लिया। हर दिन अपने पति के साथ निकलतीं, जहाँ भी अवसर मिलता, पौधा लगा देतीं। धीरे-धीरे उन्होंने लगभग 8000 पेड़ लगा दिए — जिनमें से 400 बरगद के पेड़ थे। इन पेड़ों ने न केवल उस इलाके को हरा-भरा बना दिया, बल्कि उन्हें ‘वृक्ष माता’ की उपाधि भी दिलाई।
उनका नाम ‘सालूमरदा’ कन्नड़ भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है — पेड़ों की पंक्ति। यह नाम अब उनके व्यक्तित्व का पर्याय बन चुका है।
थीमक्का का पर्यावरण प्रेम और पहचान
थीमक्का ने लगभग 4 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में पेड़ लगाए, जिससे वह इलाका एक हरित पट्टी में बदल गया। प्रकृति के प्रति उनका गहरा लगाव देखकर कई संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित किया। उन्हें पहले भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं और हाल ही में उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया।
उनकी सादगी, समर्पण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अटूट विश्वास ने उन्हें न सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में प्रेरणा का प्रतीक बना दिया है।
राष्ट्रपति भवन का अविस्मरणीय क्षण
जब 107 वर्ष की आयु में थीमक्का ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति को आशीर्वाद दिया, तो यह दृश्य भारतीय परंपरा की गहराई को भी दर्शाता है — जहाँ उम्र, पद और प्रोटोकॉल से ऊपर होता है सम्मान और स्नेह का बंधन।
थीमक्का का यह सरल और आत्मीय व्यवहार इस बात की याद दिलाता है कि असली महानता पद में नहीं, बल्कि विनम्रता और करुणा में होती है।
वृक्ष माता सालूमरदा थीमक्का आज भी इस बात की जीवंत मिसाल हैं कि यदि मन में दृढ़ संकल्प हो, तो जीवन की कोई भी कठिनाई हमें रोक नहीं सकती। उन्होंने जिस धरती को हरियाली से सजाया, उसी ने अब उन्हें अमर कर दिया है।
-अर्चना शैरी



