Jhoolan Goswami: इस वर्ष महीने भर पहले वो हो गया जो नहीं हुआ था अब तक..उस रात भारत के महिला क्रिकेट का सपना घर आ गया ..और ये सपना झूलन गोस्वामी का भी था!..
जब झूलन गोस्वामी ने 2022 में संन्यास लिया, तो उन्हें एक बात का मलाल था – भारत के लिए कभी विश्व कप ट्रॉफी नहीं उठा पाईं।
20 सालों तक, वह भारतीय क्रिकेट की धड़कन रहीं।
चकदाहा की वह लड़की जो कोलकाता में ट्रेनिंग के लिए रोज़ घंटों सफ़र करती थी। वह लंबी, ज़बरदस्त तेज़ गेंदबाज़ जिसने भारत को इंग्लैंड पर पहली वनडे जीत दिलाई। वह नेता जिसने ख़ामोशी से सपनों का बोझ ढोया।
असमान पिचों पर गेंदबाज़ी करने से लेकर युवा लड़कियों की पीढ़ियों को गेंद उठाने के लिए प्रेरित करने तक, झूलन का सफ़र धैर्य, धैर्य और शालीनता का एक उत्कृष्ट उदाहरण था।
उन्होंने रिकॉर्ड तोड़े, दुनिया का सम्मान अर्जित किया और एक ऐसी विरासत बनाई जो आंकड़ों से परे थी।
इसलिए जब हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना उनके कमरे में आईं, तो बात सिर्फ़ एक ट्रॉफी की नहीं थी – बल्कि उनके द्वारा शुरू किए गए काम को पूरा करने की थी।
कुछ रातों पहले की एक रात भुलाई नहीं जायेगी जब महिला भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराकर अपना पहला महिला विश्व कप जीता।
जैसे ही टीम ने अपनी झूलू दीदी को मैदान पर बुलाया और उनके हाथों में ट्रॉफी थमा दी, उनके चेहरे पर आँसू बहने लगे – सालों, सपनों और संघर्षों का बोझ आखिरकार खुशी में बदल गया।
वादा पूरा हो गया था।
भारत के महिला क्रिकेट का सपना घर आ गया ..और ये सपना झूलन गोस्वामी का भी था !
(अज्ञात वीरा)



